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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, SIR प्रक्रिया और 13 करोड़ नाम हटाने की जांच की मांग

| Published: | Updated:
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, SIR प्रक्रिया और 13 करोड़ नाम हटाने की जांच की मांग
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मुख्य बातें

  • देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है।
  • इस याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को चुनौती दी गई है।
  • साथ ही, मतदाता सूची से कथित तौर पर करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के मामलों की विशेष जांच दल (SIT) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
  • यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है।

नई दिल्ली (खबर डोज़ ब्यूरो)। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है। इस याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को चुनौती दी गई है। साथ ही, मतदाता सूची से कथित तौर पर करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के मामलों की विशेष जांच दल (SIT) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना कई अहम फैसले लिए। याचिका में ऐसे सभी दिशानिर्देशों, साॅफ्टवेयर बदलावों और फैसलों को असंवैधानिक तथा शून्य घोषित करने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, मूल फॉर्म-6 को तत्काल बहाल किए जाने की भी मांग की गई है ताकि नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी हो सके।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, SIR प्रक्रिया और 13 करोड़ नाम हटाने की जांच की मांग

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और मीडिया रिपोर्ट का दिया गया हवाला

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका हाल ही में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर दायर की गई है। रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों के दौरान अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में मुख्य रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर में बदलाव से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

  • चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी।
  • नए मतदाताओं के फॉर्म में एसआईआर (SIR) से जुड़े विशेष सवाल जोड़े गए थे।
  • आयुक्तों ने इन बदलावों को कथित तौर पर अनधिकृत और कानूनी रूप से अवैध बताया था।
  • याचिका में इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर संपूर्ण प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच की मांग की गई है।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, SIR प्रक्रिया और 13 करोड़ नाम हटाने की जांच की मांग

आगे की प्रक्रिया और कानूनी कदम

याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि मतदाता डेटा से छेड़छाड़ और मनमाने ढंग से नाम हटाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के आने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक फैसलों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। अब इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही इस कानूनी विवाद की दिशा तय होगी।

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