मुंबई: मुंबई में ऑटो-रिक्शा चालकों ने सरकार के मराठी बोलने की अनिवार्यता वाले नियम के खिलाफ सोमवार से तीन दिनों की हड़ताल शुरू कर दी है। कांदिवली लिंक रोड सहित शहर के विभिन्न हिस्सों में गैर-मराठी भाषी ऑटो ड्राइवरों ने विरोध प्रदर्शन किया। चालकों का कहना है कि 55 से 60 वर्ष की उम्र में नई भाषा सीखना और परिवार का पालन-पोषण करना बेहद मुश्किल है। इस नियम के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आए चालकों में अपने लाइसेंस और परमिट रद्द होने की चिंता बढ़ गई है। हड़ताल के चलते मुंबई की कई सड़कों पर जाम लग गया और यात्रियों को आवाजाही में परेशानी झेलनी पड़ी।

सरकार की कार्रवाई और नोटिस की प्रक्रिया
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से मराठी न बोलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों के खिलाफ एक विशेष जांच अभियान शुरू किया है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। इस अभियान के तहत अब तक मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में करीब 13,000 ड्राइवरों की जांच की जा चुकी है। बातचीत की परीक्षा में असफल होने वाले चालकों को मराठी सीखने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 2,500 ड्राइवरों को नोटिस दिया जा चुका है।
इससे पहले 19 अगस्त को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि चालकों को पहले नोटिस देकर 3 महीने में मराठी सीखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी मराठी नहीं सीखने पर उनका लाइसेंस और बैज निलंबित कर दिया जाएगा। हालांकि, ड्राइवरों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा दिया जा रहा एक महीने का नोटिस बेबुनियाद है और व्यावहारिक नहीं है।
आर्थिक तंगी और जुर्माने का आरोप
हड़ताल पर बैठे चालकों का आरोप है कि उन्हें कामचलाऊ मराठी सीखने का उचित अवसर देने के बजाय अधिकारियों द्वारा भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी ड्राइवरों का दावा है कि उन पर 15,000 से 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है, जिसे चुका पाना उनके बस में नहीं है। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें गाड़ियों की ईएमआई भरनी होती है। मराठी सीखने के लिए दिए गए चार सेशन (सत्र) पर्याप्त नहीं हैं, जिससे वे संकट में फंस गए हैं।
यूनियन की चिंता और आरटीओ में भ्रष्टाचार का अंदेशा
सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डी.एम. गोसावी ने सरकार के इस निर्देश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मराठी का 'वर्किंग नॉलेज' होना अनिवार्य किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया है कि चालकों को कितनी मराठी जानना जरूरी होगा। नियम स्पष्ट न होने के कारण आरटीओ (RTO) में भ्रष्टाचार और ड्राइवरों के आर्थिक शोषण की आशंका बढ़ सकती है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान
विवाद बढ़ने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि चालकों के लिए मराठी भाषा का नियम केवल बुनियादी बातचीत तक सीमित है और इसका मकसद हिंदी बोलने वाले ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि महायुति सरकार भाषा के आधार पर किसी भी चालक के साथ अन्याय नहीं होने देगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो ऑटो और टैक्सी चालकों को काम चलाने लायक मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे महाराष्ट्र में लगभग 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में चलती है। सरकार की योजना करीब 6 लाख ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ने की है। परिवहन मंत्री सरनाईक के अनुसार, कुछ महीने पहले शुरू की गई इस पहल से अब तक 1,65,601 चालक जुड़ चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि इस नियम को लागू करने वाले मंत्री प्रताप सरनाईक खुद राजनीति में आने से पहले ठाणे की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा चलाते थे और उन्होंने अगरबत्ती व कैलेंडर बेचने का काम भी किया था। बाद में वे विहंग ग्रुप के जरिए रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी कारोबार में आए और वर्तमान में शिंदे गुट की शिवसेना से विधायक हैं।





