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कोरोना मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपये, पटना हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार

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कोरोना मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपये, पटना हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार
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मुख्य बातें

  • खबर डोज़ ब्यूरो पटना हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों के पक्ष में एक बड़ा और राहत भरा आदेश जारी किया है।
  • अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल तकनीकी और कागजी बहानों के आधार पर नागरिकों को उनके कल्याणकारी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • इसके साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि मोकामा और मरांची के प्रभावित परिवारों को 'बिहार कोविड-19 सहायता योजना 2022' के तहत चार-चार लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए।
  • इस फैसले से उन तमाम परिवारों को बड़ी कानूनी राहत मिली है जिन्हें पहले प्रशासनिक स्तर पर अड़चनों का सामना करना पड़ा था।यह पूरा कानूनी मामला पटना जिले के मोकामा और मरांची इलाके के निवासी अनीश सिंह सहित आठ अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा हुआ है।
खबर डोज़ ब्यूरो पटना हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों के पक्ष में एक बड़ा और राहत भरा आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल तकनीकी और कागजी बहानों के आधार पर नागरिकों को उनके कल्याणकारी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि मोकामा और मरांची के प्रभावित परिवारों को 'बिहार कोविड-19 सहायता योजना 2022' के तहत चार-चार लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए। इस फैसले से उन तमाम परिवारों को बड़ी कानूनी राहत मिली है जिन्हें पहले प्रशासनिक स्तर पर अड़चनों का सामना करना पड़ा था।

यह पूरा कानूनी मामला पटना जिले के मोकामा और मरांची इलाके के निवासी अनीश सिंह सहित आठ अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। इन सभी के परिजनों की मौत अप्रैल और मई 2021 के दौरान देश में फैली कोरोना वायरस की भयावह दूसरी लहर के समय हुई थी। पीड़ितों ने 'बिहार कोविड सहायता योजना 2022' के प्रावधानों के तहत चार लाख रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की थी। हालांकि, जिला स्तर पर सिविल सर्जन और राज्य स्तरीय कमेटी ने इन याचिकाओं को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि जिस लैब में कोविड टेस्ट कराया गया था, वह सरकार द्वारा औपचारिक रूप से अधिसूचित सूची में शामिल नहीं थी। इसके बावजूद राज्य स्वास्थ्य समिति की अपनी सूचियों में इन सभी की मौत का कोरोना संक्रमण से होना दर्ज था और मौत के कारणों पर किसी प्रकार का कोई आधिकारिक विवाद नहीं था।

कोरोना मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपये, पटना हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार

महामारी के दौर में तकनीकी आपत्तियों को नकारा

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने राज्य सरकार की इस तकनीकी और संकीर्ण दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि महामारी के उस भयावह और असाधारण दौर में किसी आम नागरिक या मरीज के परिजनों से यह उम्मीद करना बिल्कुल व्यावहारिक नहीं है कि वे सरकारी वेबसाइट खंगालकर अधिकृत लैब की तलाश करें और फिर लंबी यात्रा करके वहां टेस्ट करवाएं। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार केवल एक मूकदर्शक नहीं हो सकती, बल्कि वह अपने नागरिकों के कल्याण और अधिकारों की संरक्षक है। किसी भी व्यक्ति को केवल कागजी या तकनीकी कमियों के आधार पर उसके वैध मुआवजे से महरूम नहीं किया जा सकता है।

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चार हफ्ते में पुनर्विचार और भुगतान के निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस फैसले की प्रति मिलने के बाद चार सप्ताह के भीतर सभी आठों याचियों के दावों पर नए सिरे से पुनर्विचार करना होगा। इसके बाद पात्रता की पुष्टि होते ही अगले चार हफ्तों के अंतराल में मुआवजे की पूरी राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है और तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

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