उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित पारिवारिक अदालत ने तलाक और गुजारा भत्ता मामले में उपस्थित न होने पर भोजपुरी अभिनेता और राजनेता पवन सिंह पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश कमलापति प्रजापति की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के लिए अगली तारीख 5 अक्टूबर तय की है।
अदालत में गैर-हाजिरी और पटना बाढ़ का हवाला
पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच जारी वैवाहिक विवाद में रखरखाव (मेंटेनेंस) याचिका पर बलिया फैमिली कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी। इस दौरान अदालत द्वारा पवन सिंह का बयान दर्ज किया जाना था, परंतु वे पीठ के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके। पवन सिंह के अधिवक्ता हरिवंश सिंह ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए दलील दी कि पटना और आसपास के इलाकों में आई भारी बाढ़ व जलजमाव के कारण उनके मुवक्किल समय पर अदालत पहुंचने में असमर्थ रहे।
दूसरी ओर, ज्योति सिंह अपने अधिवक्ता के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहीं। ज्योति सिंह के वकील ने अदालत के समक्ष आपत्ति जताते हुए कहा कि पवन सिंह इससे पूर्व भी 11 अगस्त की तारीख पर अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। बार-बार अदालत की कार्यवाही में अनुपस्थिति को देखते हुए कोर्ट ने राहत देने के साथ ही पवन सिंह पर 1,000 रुपये का न्यायिक जुर्माना (Cost) आरोपित किया।
10 करोड़ रुपये एलिमनी की मांग और विवाद की पृष्ठभूमि
भोजपुरी गायक व अभिनेता पवन सिंह की शादी उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले रामबाबू सिंह की पुत्री ज्योति सिंह से 7 मार्च 2018 को हुई थी। विवाह के कुछ ही महीनों बाद दोनों के संबंधों में कड़वाहट आ गई, जिसके बाद ज्योति सिंह ने मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की।

अप्रैल 2022 में यह मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा और दोनों पक्षों की ओर से तलाक तथा भरण-पोषण की अर्जियां दाखिल की गईं। हाल ही में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान काराकाट सीट से पवन सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने पर ज्योति सिंह ने उनके पक्ष में प्रचार भी किया था, जिससे सुलह की अटकलें लगाई गई थीं। हालांकि, चुनाव समाप्ति के बाद विवाद पुनः बढ़ गया। ज्योति सिंह ने पारिवारिक अदालत से गुहार लगाई है कि यदि पवन सिंह उन्हें साथ नहीं रखना चाहते हैं, तो उन्हें 10 करोड़ रुपये की स्थायी एलिमनी (गुजारा भत्ता) और रहने के लिए एक मकान उपलब्ध कराया जाए।
कानूनी ढांचा: मेंटेनेंस, एलिमनी और स्त्रीधन के वैधानिक प्रावधान
पारिवारिक मामलों में गुजारा भत्ता और एलिमनी तय करने के लिए भारतीय वैधानिक व्यवस्था में स्पष्ट प्रक्रियागत मानक (SOP) और कानून निर्धारित हैं। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अंतर्गत भरण-पोषण और एलिमनी को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- अंतरिम गुजारा भत्ता (धारा 24): मुकदमे के लंबित रहने के दौरान यदि पीड़ित पक्ष के पास अपने दैनिक खर्च या कानूनी प्रक्रिया का व्यय उठाने के पर्याप्त साधन नहीं हैं, तो अदालत धारा 24 के तहत अंतिम फैसला आने तक अंतरिम राहत राशि तय करती है।
- स्थायी एलिमनी एवं भरण-पोषण (धारा 25): तलाक का फैसला सुनाते समय या उसके बाद धारा 25 के तहत अदालत पति की कुल संपत्ति, मासिक आय, सामाजिक प्रतिष्ठा और जिम्मेदारियों का आकलन कर परमानेंट एलिमनी की एकमुश्त या मासिक राशि निर्धारित करती है।
- स्त्रीधन पर पूर्ण अधिकार: विवाह के समय उपहार, आभूषण या संपत्ति के रूप में महिला को मिली वस्तुएं 'स्त्रीधन' के अंतर्गत आती हैं। कानूनन इस पर केवल पत्नी का सर्वाधिकार होता है और यह एलिमनी की गणना से पूरी तरह पृथक रहता है।
- अदालती अवमानना व हर्जाना नियम: नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत यदि कोई पक्षकार बिना पर्याप्त कारण के बार-बार सम्मन के बावजूद उपस्थित नहीं होता, तो अदालत उस पर हर्जाना लगा सकती है।
आगामी कदम
और संभावित कानूनी दिशा
फैमिली कोर्ट बलिया ने मामले में 5 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है, जिसमें पवन सिंह को अनिवार्य रूप से अपना पक्ष और वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पारिवारिक विवादों में अदालतें दोनों पक्षों की आय का हलफनामा (Income Affidavit) मांगती हैं, जिसके आधार पर ही एलिमनी की अंतिम राशि तय की जाती है।





