बिहार में कुल 8 सीटों पर विधान परिषद चुनाव होने हैं। इन चुनावों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले शिक्षक सीधे तौर पर मतदाता की भूमिका निभाते हैं। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की घोषणा किए जाने के बाद राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह अंदेशा जताया गया कि यदि इस दौरान बड़े पैमाने पर शिक्षकों का तबादला किया जाता है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से ऐच्छिक ट्रांसफर-पोस्टिंग के पोर्टल को खोलने के फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

त्योहारों और चुनाव के बाद ही खुलेगा पोर्टल
शिक्षकों को अब ट्रांसफर के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। बिहार विधान परिषद चुनाव की पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक चलने वाली है। इस समयावधि के दौरान दशहरा, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और बिहार का सबसे बड़ा महापर्व छठ जैसे कई बड़े त्योहार भी आएंगे। इन छुट्टियों और चुनावी व्यस्तताओं के बीच शिक्षा विभाग द्वारा प्रशासनिक कामकाज को संभालते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि अब छठ महापर्व और चुनाव संपन्न होने के बाद ही तबादले के लिए पोर्टल दोबारा खोला जा सकता है।

पहले बाढ़ और अब चुनाव बना बाधा
गौरतलब है कि शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के तबादले के लिए सबसे पहले 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की थी। हालांकि, उस समय राज्य के कई जिलों में आई भीषण बाढ़ की वजह से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना पड़ा था और अक्टूबर महीने में आवेदन लिए जाने की बात कही गई थी। लेकिन अब चुनाव की घोषणा और आचार संहिता के बंधन ने एक बार फिर इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। तमाम परिस्थितियों को देखते हुए अब शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि दिसंबर महीने तक ही शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया दोबारा पटरी पर लौट सकती है।





