मौजूदा समय में आरबीआई ने नीतिगत दरों में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, नोमुरा का अनुमान है कि बढ़ती महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने के लिए सेंट्रल बैंक सख्त रुख अपना सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में हर बार 25-25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे टर्मिनल रेपो रेट बढ़कर 5.75 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगा। इसका मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में बैंकों से कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा।

क्यों बढ़ानी पड़ सकती है ब्याज दरें?
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में महंगाई के मोर्चे पर जोखिम बने हुए हैं। इस साल कम बारिश और खरीफ फसल की बुवाई प्रभावित होने के कारण खाद्य महंगाई (फूड इन्फ्लेशन) में तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।
- नोमुरा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में सीपीआई (CPI) खुदरा महंगाई औसतन 5.2 प्रतिशत रह सकती है।
- खाने-पीने की चीजों की बढ़ी कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई बढ़कर 6.3 फीसदी तक पहुंच सकती है।
- सरकार द्वारा चीनी पर स्टॉक लिमिट और प्याज की खुले बाजार में बिक्री जैसे कदम उठाए जाने के बावजूद फसल उत्पादन कम होने से कीमतों का दबाव बना हुआ है।

आगे कैसी रहेगी आर्थिक स्थिति और कब मिलेगी राहत?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरवरी 2027 के बाद ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना काफी कम हो जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि उस समय तक खपत में सुस्ती और महंगाई के आंकड़े दोबारा रिजर्व बैंक के निर्धारित दायरे में आ जाएंगे। हालांकि, तब तक उपभोक्ताओं को ऊंची ब्याज दरों और महंगे कर्ज के दौर से गुजरना पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकों में इस पर अंतिम स्थिति साफ होगी।





