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उज्जैन के इस मंदिर में 'मौत' मांगने आते हैं लोग, 24 घंटे में पूरी होती है मुराद

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उज्जैन के इस मंदिर में 'मौत' मांगने आते हैं लोग, 24 घंटे में पूरी होती है मुराद
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मुख्य बातें

  • उज्जैन (खबर डोज़ ब्यूरो) मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में शिप्रा नदी के रामघाट के पास स्थित एक प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी और चौंकाने वाली परंपरा के लिए देश भर में चर्चा का विषय रहता है।
  • आमतौर पर लोग मंदिरों में लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की लंबी कामना करते हैं, लेकिन इस मंदिर में लोग अपने या अपनों के लिए जीवन नहीं बल्कि मृत्यु और मोक्ष का आशीर्वाद मांगने पहुंचते हैं।
  • मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, यहां विशेष पूजा या अनुष्ठान कराने के बाद 24 घंटे के भीतर परिणाम सामने आ जाते हैं।
  • शिप्रा नदी के किनारे रामघाट पर बने इस मंदिर में भगवान धर्मराज और चित्रगुप्त की मूर्तियां विराजमान हैं।

उज्जैन (खबर डोज़ ब्यूरो) मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में शिप्रा नदी के रामघाट के पास स्थित एक प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी और चौंकाने वाली परंपरा के लिए देश भर में चर्चा का विषय रहता है। आमतौर पर लोग मंदिरों में लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की लंबी कामना करते हैं, लेकिन इस मंदिर में लोग अपने या अपनों के लिए जीवन नहीं बल्कि मृत्यु और मोक्ष का आशीर्वाद मांगने पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, यहां विशेष पूजा या अनुष्ठान कराने के बाद 24 घंटे के भीतर परिणाम सामने आ जाते हैं। शिप्रा नदी के किनारे रामघाट पर बने इस मंदिर में भगवान धर्मराज और चित्रगुप्त की मूर्तियां विराजमान हैं। शाम के समय यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी राकेश जोशी ने बताया कि जो जीव-जंतु या मनुष्य शारीरिक कष्टों के कारण लंबे समय से गंभीर पीड़ा झेलते हैं और जीवन-मृत्यु के संघर्ष से गुजर रहे होते हैं, उनके परिजन यहां रक्षा या मोक्ष प्राप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान कराने आते हैं। पूजा-अर्चना के बाद 24 घंटे के भीतर या तो रोगी को स्वास्थ्य लाभ मिलता है या फिर उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

उज्जैन के इस मंदिर में 'मौत' मांगने आते हैं लोग, 24 घंटे में पूरी होती है मुराद

दीपक जलाने की है विशेष मान्यता

पुजारी राकेश जोशी के अनुसार, मंदिर में घी का दीपक जलाने का विधान है जो धर्मराज और चित्रगुप्त को प्रसन्न करता है। जो व्यक्ति भयंकर शारीरिक कष्टों से पीड़ित होता है और चाहता है कि या तो उसका कष्ट दूर हो जाए या उसे मुक्ति मिल जाए, उसके नाम से यहां विधि-विधान से घी का दीपक लगाया जाता है। इस प्रक्रिया से कष्टों का निवारण होने और मोक्ष मिलने की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु अपने जीवन के अंतिम पड़ाव या गंभीर बीमारियों से मुक्ति की आस लेकर इस धार्मिक स्थल पर पहुंचते हैं।

उज्जैन के इस मंदिर में 'मौत' मांगने आते हैं लोग, 24 घंटे में पूरी होती है मुराद

400 साल पुराना इतिहास और कर्क रेखा का महत्व

इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। पुजारी परिवार के मुताबिक, बीते 400 सालों से उनके पूर्वज इस पवित्र स्थल पर पूजा-पाठ और अनुष्ठान करते आ रहे हैं। इतिहास के पन्नों में साल 1702 में भी यहां पूजा-अर्चना किए जाने के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। इसके अलावा, इस मंदिर की भौगोलिक स्थिति भी इसे बेहद खास बनाती है। मंदिर के ठीक ऊपर से कर्क रेखा गुजरती है, जिसके कारण धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से इसका महत्व काफी बढ़ जाता है। रोग-दोष से मुक्ति पाने और मोक्ष की कामना को लेकर आने वाले श्रद्धालुओं का तांता यहां रोजाना लगा रहता है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुजारियों द्वारा यहां आने वाले भक्तों की आस्था के अनुरूप सभी जरूरी धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से संपन्न कराए जाते हैं।

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