नई दिल्ली (खबर डोज़ ब्यूरो) मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच देश में यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कानूनी रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाया जा सकता है या इस्तीफा मांगा जा सकता है। इस कानूनी और राजनीतिक सवाल पर स्पष्टीकरण देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा है कि कानूनन ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा नहीं लिया जा सकता, बल्कि उन्हें अपने विवेक के आधार पर ही त्यागपत्र देना होगा।

कांग्रेस नेता ने बताया कि भारतीय संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की प्रक्रिया को लेकर सीधे तौर पर कोई विशेष उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 324 में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, उनके कार्यकाल और उन्हें पद से हटाने के प्रावधानों का स्पष्ट जिक्र मिलता है। मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त स्वैच्छिक तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके ऐतिहासिक उदाहरण भी मौजूद हैं, जैसे साल 2020 में अशोक लवासा और साल 2024 में अरुण गोयल ने विभिन्न वजहों से अपने पदों से इस्तीफा दिया था। कोई भी बाहरी ताकत या कानून उन्हें जबरन हटाने का अधिकार नहीं रखता है।
नैतिक आधार और प्रदर्शन की वजह
जब उनसे यह सवाल किया गया कि जब कानूनन इस्तीफा नहीं लिया जा सकता है, तो फिर सड़कों पर इतना बड़ा प्रदर्शन क्यों किया जा रहा है? इस पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से नैतिक आधार पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र के सबसे ताकतवर और संवेदनशील पदों में से एक पर आसीन हैं। यदि ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर ही आम नागरिकों और राजनीतिक दलों के मन में संदेह पैदा होने लगे, तो पूरी चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए नैतिक रूप से उन्हें स्वयं ही इस पर विचार करना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे प्रकरण को लेकर कई याचिकाएं पहले से ही दर्ज की गई हैं। इन याचिकाओं में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब देश की शीर्ष अदालत की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी का गठन करे। एक ऐसी कमेटी जो सभी पक्षों के संदेहों की जांच करके स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर सके। यदि समय रहते इस मामले की ठोस जांच नहीं होती है और वह पद पर बने रहते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर जनता के बीच का संदेह और अधिक गहराता चला जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की कानूनी प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 324(5) में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के समान तरीके से और समान आधारों पर ही पद से हटाया जा सकता है। यही नहीं, वर्ष 2023 के अधिनियम की धारा 11(2) में भी इसी कानूनी प्रक्रिया का जिक्र मिलता है। इसके अलावा, अनुच्छेद 124(4) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को प्रमाणित दुर्व्यवहार या उनकी अक्षमता के आधार पर ही पद से हटाने का नियम तय किया गया है।

दुर्व्यवहार की परिभाषा के अंतर्गत किसी भी प्रकार की भ्रष्ट गतिविधियां या आधिकारिक पद का दुरुपयोग करना शामिल होता है। वर्षों से देश की अदालतों ने इसकी व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया है कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के अनुकूल कार्य न करना या अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल होना भी शामिल है। चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था को किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबावों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ही मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के इन मानदंडों को जानबूझकर बेहद कठिन रखा गया है ताकि संस्था की निष्पक्षता बरकरार रहे।





