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मुंगेर का कल्याणपुर बना बिहार का आकर्षण केंद्र, ₹3 करोड़ के ट्विन टावर पंडाल में दिखी 363 साल पुरानी आस्था

| Published: | Updated:
मुंगेर का कल्याणपुर बना बिहार का आकर्षण केंद्र, ₹3 करोड़ के ट्विन टावर पंडाल में दिखी 363 साल पुरानी आस्था
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मुख्य बातें

  • मुंगेर, बिहार | Khabardoze बिहार में शारदीय नवरात्र के अवसर पर इस बार दुर्गा पूजा पंडालों की भव्यता देखते ही बन रही है।
  • पटना, गया, भागलपुर और दूसरे जिलों में आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं, लेकिन मुंगेर जिले के कल्याणपुर में स्थित बड़ी दुर्गा महारानी का पंडाल विशेष चर्चा में है।
  • यहां मलेशिया के प्रसिद्ध पेट्रोनास ट्विन टावर की तर्ज पर तैयार किया गया विशाल पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
  • करीब तीन करोड़ रुपये के अनुमानित बजट से तैयार इस पंडाल में आधुनिक वास्तुकला, शानदार रोशनी, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।

मुंगेर का कल्याणपुर बना बिहार का आकर्षण केंद्र, ₹3 करोड़ के ट्विन टावर पंडाल में दिखी 363 साल पुरानी आस्था

मुंगेर, बिहार | Khabardoze

बिहार में शारदीय नवरात्र के अवसर पर इस बार दुर्गा पूजा पंडालों की भव्यता देखते ही बन रही है। पटना, गया, भागलपुर और दूसरे जिलों में आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं, लेकिन मुंगेर जिले के कल्याणपुर में स्थित बड़ी दुर्गा महारानी का पंडाल विशेष चर्चा में है। यहां मलेशिया के प्रसिद्ध पेट्रोनास ट्विन टावर की तर्ज पर तैयार किया गया विशाल पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है। करीब तीन करोड़ रुपये के अनुमानित बजट से तैयार इस पंडाल में आधुनिक वास्तुकला, शानदार रोशनी, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।

कल्याणपुर की दुर्गा पूजा सिर्फ भव्य सजावट की वजह से खास नहीं है। यहां मां दुर्गा की आराधना की परंपरा करीब 363 साल पुरानी बताई जाती है। समय के साथ आयोजन का स्वरूप बदला, लेकिन स्थानीय लोगों की श्रद्धा और भागीदारी बरकरार रही। आज यह आयोजन मुंगेर के साथ आसपास के कई जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।


मलेशिया के ट्विन टावर की तर्ज पर बना भव्य पंडाल

मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड स्थित कल्याणपुर में इस साल मलेशिया की प्रसिद्ध इमारत पेट्रोनास ट्विन टावर को पंडाल की मुख्य थीम बनाया गया है। दोनों ऊंचे टावरों के स्वरूप और उन्हें जोड़ने वाली संरचना को तैयार करने के लिए कारीगरों ने महीनों तक मेहनत की है।

इस पंडाल का ढांचा मुख्य रूप से बांस, लकड़ी और अन्य सजावटी सामग्री की मदद से तैयार किया गया है। इमारत को वास्तविक स्वरूप देने के लिए आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और बारीक कलाकारी का सहारा लिया गया है। पंडाल की ऊंचाई को लेकर अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में लगभग 200 से 250 फीट तक के आंकड़े सामने आए हैं, हालांकि इसकी एक समान आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

आयोजन पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। यही वजह है कि कल्याणपुर का यह आयोजन बिहार के सबसे महंगे और भव्य दुर्गा पूजा पंडालों में गिना जा रहा है।

विक्टोरिया हाउस में भगवान भोलेनाथ की झांकी

इस बार कल्याणपुर में आकर्षण केवल ट्विन टावर तक सीमित नहीं है। पूजा परिसर में ब्रिटिश पार्लियामेंट और विक्टोरिया हाउस से प्रेरित संरचना भी तैयार की गई है, जिसमें भगवान भोलेनाथ की विशेष झांकी को स्थान दिया गया है।

आयोजकों ने पंडाल में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं को अलग अनुभव देने का प्रयास किया है। प्रवेश द्वार पर कृत्रिम झरना, रास्तों में सजावटी रोशनी, एलईडी गेट और कांच की कलात्मक सजावट इस आयोजन की खासियत हैं।

रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी में जगमगाता परिसर विशेष रूप से आकर्षक दिखाई देता है। लेजर शो और सजावटी प्रकाश व्यवस्था को भी इस वर्ष के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया है।

मुंगेर का कल्याणपुर बना बिहार का आकर्षण केंद्र, ₹3 करोड़ के ट्विन टावर पंडाल में दिखी 363 साल पुरानी आस्था

363 साल पुरानी है बड़ी दुर्गा महारानी की पूजा परंपरा

कल्याणपुर की पहचान केवल आधुनिक और महंगे पूजा पंडालों से नहीं जुड़ी है। स्थानीय परंपरा के अनुसार यहां बड़ी दुर्गा महारानी की पूजा लगभग 363 वर्षों से होती आ रही है।

कई पीढ़ियों से स्थानीय परिवार इस आयोजन से जुड़े हुए हैं। पूजा की तैयारी, प्रतिमा निर्माण, पंडाल सजावट और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए गांव के लोग सामूहिक रूप से काम करते हैं।

पहले यह आयोजन मुख्य रूप से स्थानीय धार्मिक उत्सव के रूप में जाना जाता था। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बड़े और अनोखे थीम वाले पंडालों के कारण इसकी पहचान तेजी से बढ़ी है।

कल्याणपुर की दुर्गा पूजा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यही है कि यहां पुरानी धार्मिक परंपरा को आधुनिक आयोजन के साथ जोड़ा गया है। मंदिर में पूजा और आराधना का अपना महत्व है, जबकि बाहर का विशाल पंडाल नई पीढ़ी के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है।

छह वर्षों में हवा महल से ट्विन टावर तक का सफर

कल्याणपुर दुर्गा पूजा समिति पिछले कई वर्षों से देश-दुनिया की प्रसिद्ध इमारतों को अपनी थीम बना रही है।

साल 2021 में राजस्थान के जयपुर स्थित हवा महल की तर्ज पर पंडाल बनाया गया था, जिस पर लगभग 80 लाख रुपये खर्च होने की खबर थी।

इसके बाद 2022 में मुंबई के ताज होटल, 2023 में तमिलनाडु के मीनाक्षी अम्मन मंदिर और 2024 में दुबई के बुर्ज खलीफा को थीम बनाया गया।

साल 2025 में बैंकॉक के प्रसिद्ध अरुण मंदिर से प्रेरित पंडाल तैयार किया गया था। इस आयोजन पर करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई थी।

अब 2026 में पेट्रोनास ट्विन टावर की थीम और करीब तीन करोड़ रुपये के अनुमानित बजट ने कल्याणपुर के आयोजन को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

अलग-अलग राज्यों के कारीगरों ने तैयार किया पंडाल

इतने बड़े आयोजन को तैयार करना आसान नहीं है। इसके पीछे कई महीनों की योजना, कारीगरों की मेहनत और स्थानीय लोगों का सहयोग होता है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पंडाल निर्माण में पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा समेत विभिन्न राज्यों के कारीगरों ने योगदान दिया है। सजावट और कलात्मक कार्यों के लिए दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश से भी कलाकारों की मदद ली गई।

विशाल ढांचे को तैयार करने से लेकर रोशनी लगाने और छोटी-छोटी सजावट को अंतिम रूप देने तक अलग-अलग कामों में विशेषज्ञ कारीगर शामिल रहे।

इस आयोजन की खास बात यह है कि विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों की कारीगरी एक ही धार्मिक परिसर में दिखाई देती है। इससे पंडाल केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि हस्तकला और रचनात्मकता का एक बड़ा उदाहरण भी बन जाता है।

मुंगेर का कल्याणपुर बना बिहार का आकर्षण केंद्र, ₹3 करोड़ के ट्विन टावर पंडाल में दिखी 363 साल पुरानी आस्था

पवन सिंह और रवि किशन के कार्यक्रम से बढ़ा उत्साह

कल्याणपुर दुर्गा पूजा महोत्सव इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर भी काफी चर्चा में है।

18 अक्टूबर की शाम आयोजित कार्यक्रम में भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकार पवन सिंह और रवि किशन पहुंचे। दोनों कलाकारों को देखने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक कल्याणपुर पहुंचे थे।

कार्यक्रम के दौरान पवन सिंह ने अपने लोकप्रिय भोजपुरी गीत प्रस्तुत किए। उनके मंच पर पहुंचते ही प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत मां गंगा की आरती के साथ हुई। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला आगे बढ़ा। आयोजन में अन्य भोजपुरी और हिंदी गायकों के कार्यक्रम भी प्रस्तावित किए गए हैं।

इस तरह कल्याणपुर का दुर्गा पूजा महोत्सव धार्मिक आराधना के साथ संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी एक प्रमुख आयोजन बन गया है।

मुंगेर सहित कई जिलों से पहुंच रहे श्रद्धालु

कल्याणपुर के पंडाल की चर्चा मुंगेर जिले तक सीमित नहीं है। आयोजन से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, भागलपुर, बांका, खगड़िया, जमुई, लखीसराय, बेगूसराय और पूर्णिया जैसे जिलों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

इस साल पूजा महोत्सव के दौरान एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि वास्तविक कुल आगंतुकों की अंतिम संख्या अभी सामने नहीं आई है।

दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंडाल की भव्यता के साथ बड़ी दुर्गा महारानी का दर्शन मुख्य आकर्षण है। अनेक लोग पूरे परिवार के साथ पूजा देखने पहुंच रहे हैं।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से स्थानीय बाजारों और छोटे व्यवसायों के लिए भी अवसर पैदा होते हैं। खाने-पीने की दुकानें, परिवहन सेवाएं और पूजा सामग्री से जुड़े कारोबार आयोजन के दौरान सक्रिय रहते हैं। इस तरह धार्मिक उत्सव स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ जाता है।

भीड़ को संभालने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम

विशाल पंडाल और बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा इस आयोजन का महत्वपूर्ण पहलू है।

आयोजकों के अनुसार, लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए चार अलग-अलग निकास द्वार बनाए गए हैं। पंडाल परिसर में बैरिकेडिंग और अन्य व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया गया है।

आयोजन से जुड़े डॉ. नीतिश चंद्र दुबे ने जानकारी दी है कि मेले में अव्यवस्था फैलाने वालों की पहचान के लिए एआई तकनीक वाले कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके अलावा पूजा समिति और कल्याणपुर यूथ क्लब के सदस्य स्थानीय स्तर पर व्यवस्था संभालने में सहयोग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी भीड़ वाले आयोजनों में प्रवेश और निकास मार्गों को खुला रखना, आपातकालीन सेवाओं के लिए जगह सुनिश्चित करना और श्रद्धालुओं को स्पष्ट दिशा-निर्देश देना बेहद जरूरी है।

आस्था और उत्साह के साथ सुरक्षा नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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आयोजन को भव्य बनाने में डॉ. नीतिश चंद्र दुबे की भूमिका

कल्याणपुर के दुर्गा पूजा महोत्सव को व्यापक स्वरूप देने में समाजसेवी और होम्योपैथ चिकित्सक डॉ. नीतिश चंद्र दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।

वह वर्षों से इस आयोजन से जुड़े रहे हैं। स्थानीय पूजा समिति, यूथ क्लब और ग्रामीणों के साथ मिलकर महोत्सव की तैयारियों को आगे बढ़ाने में उनका योगदान रहा है।

पूजा आयोजन का दायरा बढ़ने के साथ इसकी व्यवस्थाओं और सजावट पर होने वाला अनुमानित खर्च भी बढ़ा है। आयोजन से जुड़े लोगों का उद्देश्य हर साल श्रद्धालुओं को एक नई थीम के जरिए विशेष अनुभव देना रहा है।

हालांकि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता में वित्तीय सहयोग के साथ स्थानीय स्वयंसेवकों, कारीगरों और व्यवस्थापकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।

दीपावली पर 15 लाख दीप जलाने की योजना

दुर्गा पूजा की भव्यता के बीच कल्याणपुर में एक और बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारी की जानकारी सामने आई है।

आयोजक डॉ. नीतिश चंद्र दुबे के अनुसार, दीपावली के अवसर पर कल्याणपुर में लगभग 15 लाख दीप जलाने की योजना बनाई गई है।

आयोजकों का लक्ष्य इसे बिहार के सबसे बड़े दीपोत्सवों में शामिल करना है। हालांकि यह अभी घोषित योजना है और कार्यक्रम के पूरा होने के बाद ही वास्तविक संख्या की पुष्टि हो सकेगी।

यदि यह आयोजन निर्धारित योजना के अनुसार होता है, तो कल्याणपुर एक बार फिर बड़े धार्मिक कार्यक्रम को लेकर चर्चा में आ सकता है।

आखिर क्यों खास बन गया कल्याणपुर का दुर्गा पूजा पंडाल?

बिहार में दुर्गा पूजा की समृद्ध परंपरा रही है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में माता की भव्य प्रतिमाएं और आकर्षक पंडाल तैयार किए जाते हैं, लेकिन कल्याणपुर की विशेषता इसकी पुरानी धार्मिक विरासत और लगातार बदलती अंतरराष्ट्रीय थीम हैं।

यहां एक तरफ सदियों पुरानी बड़ी दुर्गा महारानी की पूजा होती है, तो दूसरी तरफ दुनिया की प्रसिद्ध इमारतों की प्रतिकृतियां तैयार की जाती हैं।

करीब तीन करोड़ रुपये का अनुमानित बजट, ट्विन टावर की संरचना, विक्टोरिया हाउस की झांकी, कारीगरों की मेहनत और बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इस साल के आयोजन को अलग पहचान दी है।

कल्याणपुर का यह महोत्सव बताता है कि परंपरा और आधुनिक रचनात्मकता एक साथ आगे बढ़ सकती हैं। जहां धार्मिक आस्था लोगों को जोड़ती है, वहीं कला और भव्य सजावट आयोजन को व्यापक पहचान दिलाती है।

आपको बिहार के दुर्गा पूजा पंडालों में कल्याणपुर का ट्विन टावर पंडाल कैसा लगा? क्या आपने इस साल यहां मां दुर्गा के दर्शन किए हैं? अपनी राय जरूर बताएं।

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