Breaking
Explained

गांव वालों ने सरकार से की शराब की दुकान खोलने की मांग,संकट में सरकार

By | Published: 09 Jul 2026, 10:25 AM
👁 48 views
गांव वालों ने सरकार से की शराब की दुकान खोलने की मांग,संकट में सरकार
Share:

मुख्य बातें

  • देशभर में आमतौर पर गांवों और शहरों से एक ही मांग सुनने को मिलती है.."शराब की दुकान बंद होनी चाहिए।" लेकिन आज की खबर बिल्कुल अलग है।
  • एक गांव के लोगों ने सरकार से खुद कहा है कि गांव में सरकारी शराब की दुकान खोली जाए।
  • अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्यों?
  • क्या गांव वाले शराब को बढ़ावा देना चाहते हैं?

देशभर में आमतौर पर गांवों और शहरों से एक ही मांग सुनने को मिलती है.."शराब की दुकान बंद होनी चाहिए।" लेकिन आज की खबर बिल्कुल अलग है। एक गांव के लोगों ने सरकार से खुद कहा है कि गांव में सरकारी शराब की दुकान खोली जाए। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्यों? क्या गांव वाले शराब को बढ़ावा देना चाहते हैं? बिल्कुल नहीं... इसके पीछे की वजह भी ऐसी है की सुनकर आप हैरान हो जाएंगे।


जहां एक तरफ देश के कई हिस्सों में शराब की दुकानों को बंद कराने की मांग उठती रहती है, वहीं एक गांव से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है। यहां ग्रामीणों ने सरकार से गांव में सरकारी शराब की दुकान खोलने की मांग कर दी है। पहली नजर में यह मांग हैरान करने वाली लग सकती है, लेकिन जब इसकी वजह सामने आती है तो पूरा मामला समझ में आता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में लंबे समय से अवैध महुआ शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। गांव में जगह-जगह कच्ची शराब बनाई और बेची जा रही है। इस शराब को पीकर कई लोग नशे के आदी हो चुके हैं, जबकि कई लोगों की तबीयत भी खराब हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध शराब बेचने वालों पर कार्रवाई तो होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही कारोबार शुरू हो जाता है। यही वजह है कि गांव में अवैध शराब का जाल लगातार फैलता जा रहा है।


इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए गांव की ग्राम सभा में एक अनोखा प्रस्ताव रखा गया। बैठक में मौजूद लोगों ने सरकार से मांग की कि गांव में एक लाइसेंसी यानी सरकारी कंपोजिट शराब दुकान खोली जाए। ग्रामीणों का मानना है कि अगर सरकारी दुकान खुलेगी तो अवैध महुआ शराब का कारोबार काफी हद तक कम हो सकता है। उनका कहना है कि जब लोगों को सरकारी लाइसेंस वाली शराब मिलेगी, तो जहरीली और कच्ची शराब की मांग अपने आप घटेगी। इससे लोगों की सेहत पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा और अवैध कारोबार करने वालों पर भी रोक लगेगी।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उनका मकसद शराब की बिक्री बढ़ाना नहीं है। उनकी सबसे बड़ी चिंता गांव में खुलेआम बिक रही अवैध शराब है, जो लोगों की जान के लिए खतरा बनती जा रही है। इसी सोच के साथ ग्राम सभा में प्रस्ताव पास किया गया और इसे सरकार के पास भेजने का फैसला लिया गया।


यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले की टुण्ड्रा तहसील के ग्राम पंचायत नरधा का है। 24 जून को हुई ग्राम सभा की बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। अब इस प्रस्ताव की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। लोग भी इस बात पर अलग-अलग राय दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सरकारी दुकान खुलने से अवैध शराब पर रोक लग सकती है, जबकि कुछ का मानना है कि इसका बेहतर समाधान अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई करना है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन इस मामले में क्या फैसला लेता है। क्या अवैध महुआ शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई होगी? या फिर ग्रामीणों की मांग को देखते हुए गांव में सरकारी शराब की दुकान खोलने पर विचार किया जाएगा? फिलहाल इतना तय है कि यह मामला उन खबरों से बिल्कुल अलग है, जहां शराब की दुकान बंद कराने की मांग होती है। यहां गांव वालों की प्राथमिकता शराब बेचना नहीं, बल्कि अवैध और जहरीली शराब के खतरे से लोगों को बचाना है। अब सबकी नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। देखना होगा कि ग्रामीणों की इस अनोखी मांग पर क्या फैसला लिया जाता है और क्या इससे गांव में अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लग पाती है या नहीं। फिलहाल, इस अनोखे प्रस्ताव ने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। अब इंतजार इस बात का है कि सरकार और प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और गांव को अवैध शराब की समस्या से राहत दिलाने के लिए कौन सा रास्ता चुनते हैं।

Read This Also