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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: नितिन गडकरी बोले- अब देश में हवा में उड़ने वाली बसें लाने की है तैयारी

By | Published: 14 Jul 2026, 05:50 PM
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: नितिन गडकरी बोले- अब देश में हवा में उड़ने वाली बसें लाने की है तैयारी
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मुख्य बातें

  • केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा बयान दिया है।
  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार देश में हवा में उड़ने वाली बसों (फ्लाइंग बस) की अवधारणा को साकार करने की दिशा में ...
  • नितिन गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब एथेनॉल (E20) के मुद्दे पर विपक्ष उन पर लगातार हमलावर है।
  • इस बीच, उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा बयान दिया है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार देश में हवा में उड़ने वाली बसों (फ्लाइंग बस) की अवधारणा को साकार करने की दिशा में काम कर रही है। नितिन गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब एथेनॉल (E20) के मुद्दे पर विपक्ष उन पर लगातार हमलावर है। इस बीच, उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस तरह भारत में पानी पर उतरने वाले विमान (सीप्लेन) की शुरुआत की गई थी, उसी तरह अब हवा में उड़ने वाली बसों को भी हकीकत में बदलने की तैयारी की जा रही है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जनता को समर्पित, समय की होगी बड़ी बचत

इस कार्यक्रम के दौरान राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर को जोड़ने वाले 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-6) का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित कर दिया गया। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया है। पहले जहां लखनऊ से कानपुर की दूरी तय करने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता था, वहीं अब यह सफर महज 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2018 में लखनऊ और कानपुर के बीच लगातार बढ़ते यातायात के दबाव और जाम की गंभीर समस्या को देखते हुए की गई थी। लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस एक्सप्रेसवे को साकार करने में करीब 1,648 दिनों की कड़ी मेहनत लगी है।


परियोजना का इतिहास और दो पैकेजों का विवरण

इस एक्सप्रेसवे परियोजना की आधारशिला मार्च 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा रखी गई थी। इसके बाद, दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने इसके महत्व को रेखांकित करते हुए इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (एनई-6) का आधिकारिक दर्जा प्रदान किया था।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस पूरी परियोजना को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए इसे दो अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया था:

  • पहला पैकेज: यह लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसकी लंबाई लगभग 18 किलोमीटर है। यह एक एलिवेटेड सेक्शन है।
  • दूसरा पैकेज: यह लगभग 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन है। यह मार्ग लखनऊ के 11 गांवों और उन्नाव के 31 गांवों से होकर गुजरता है।

इस पूरे एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य का दायित्व पीएनसी इंफ्राटेक कंपनी को सौंपा गया था, जिसने इसे निर्धारित मानकों के तहत पूरा किया है।


अत्याधुनिक तकनीक और बिना रुके टोल कटने की एमएलएफएफ प्रणाली

यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक मार्गों में से एक है, जिसे अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसके निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड मशीन गाइड कंस्ट्रक्शन सिस्टम, कंप्यूटर और सैटेलाइट आधारित तकनीक का उपयोग किया गया है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सटीकता में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित किया गया है।

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी और प्रमुख विशेषता इसकी मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली है। इस मार्ग पर पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं, जिससे वाहनों को टोल टैक्स देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। वाहन चालक बिना किसी रुकावट के 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक यात्रा कर सकेंगे। एक्सप्रेसवे पर एडवांस फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके माध्यम से वाहनों का टोल स्वतः ही कट जाएगा। इस आधुनिक व्यवस्था से न केवल यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से भी पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।

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