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पटना NEET छात्रा मौत मामले में नहीं मिला सबूत: CBI ने कोर्ट में दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, 13 अक्टूबर को सुनवाई

| Published: | Updated:
पटना NEET छात्रा मौत मामले में नहीं मिला सबूत: CBI ने कोर्ट में दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, 13 अक्टूबर को सुनवाई
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मुख्य बातें

  • बिहार के बहुचर्चित नीट छात्रा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने स्थानीय पॉक्सो की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
  • जांच एजेंसी को इस मामले में हत्या या दुष्कर्म के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
  • पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन इस क्लोजर रिपोर्ट पर आगामी 13 अक्टूबर को सुनवाई करेंगे।
  • अदालत ने मामले के सूचक यानी मृतका के पिता को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार के बहुचर्चित नीट छात्रा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने स्थानीय पॉक्सो की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी को इस मामले में हत्या या दुष्कर्म के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन इस क्लोजर रिपोर्ट पर आगामी 13 अक्टूबर को सुनवाई करेंगे। अदालत ने मामले के सूचक यानी मृतका के पिता को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

यह मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल का है। मूल रूप से जहानाबाद की रहने वाली और पटना में रहकर नीट (NEET) की तैयारी करने वाली छात्रा 6 जनवरी, 2026 को हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी, 2026 को उसकी मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन और अन्य लोगों पर दुष्कर्म के बाद हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया था।

पटना NEET छात्रा मौत मामले में नहीं मिला सबूत: CBI ने कोर्ट में दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, 13 अक्टूबर को सुनवाई

स्थानीय पुलिस से लेकर सीबीआई जांच तक का सफर

छात्रा के पिता के बयान पर 9 जनवरी, 2026 को चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। तत्कालीन थाना प्रभारी रौशनी कुमारी ने मामले की शुरुआती जांच शुरू की थी। हालांकि, इस मामले को लेकर पटना में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे। जनाक्रोश को देखते हुए तत्कालीन आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी, जिसके बाद दिल्ली सीबीआई की टीम ने जांच अपने हाथ में ली थी।

जांच के दौरान पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन कानूनी पेचदगियों के कारण मनीष रंजन को नियमित जमानत मिल गई। दरअसल, निर्धारित समय सीमा के भीतर न तो बिहार पुलिस की एसआईटी और न ही सीबीआई पॉक्सो कोर्ट में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर सकी। इसी तकनीकी आधार पर आरोपी को अदालत से नियमित जमानत मिल गई थी।

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हाईकोर्ट में लंबित है सीबीआई की याचिका

इस मामले में एक और कानूनी मोड़ तब आया जब पॉक्सो की विशेष अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत मृतका की मां का बयान दर्ज करे। सीबीआई ने इस आदेश को चुनौती देते हुए पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जो फिलहाल लंबित है।

दूसरी ओर, मृतका के माता-पिता ने जांच एजेंसियों और डॉक्टरों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि इस वारदात के पीछे रसूखदार लोग शामिल हैं और उन्हें बचाने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। परिजनों ने जांच टीम की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि मामला पूरी तरह बंद हो गया है। जब जांच एजेंसी को कोई ठोस सबूत नहीं मिलता, तब वह अदालत में अंतिम प्रपत्र या क्लोजर रिपोर्ट सौंपती है। अब 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में यदि अदालत परिजनों की आपत्तियों से सहमत होती है, तो वह इस रिपोर्ट को खारिज कर दोबारा जांच के आदेश दे सकती है या खुद संज्ञान ले सकती है।

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