चुनावी माहौल के दौरान प्रेस से बात करते हुए डॉ. संजीव कुमार ने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए यह तीखा हमला बोला। उनके दावे के मुताबिक, जमीन से जुड़े एक विवाद के दौरान यह कथित घटनाक्रम सामने आया था। संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि पिटाई के बाद नवल किशोर यादव को कथित तौर पर बांधकर गाड़ी में बैठाया गया और वहां से हटाया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अन्य पक्षों और चश्मदीदों के बياनों का इंतजार है, लेकिन इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है।
शिक्षक समाज के आचरण और सम्मान पर तीखी बहस
केवल मारपीट के कथित वाकये तक ही यह विवाद सीमित नहीं रहा, बल्कि राजद प्रत्याशी ने नवल किशोर यादव के सार्वजनिक आचरण पर भी गंभीर सवाल उठाए। डॉ. संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि शिक्षक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधि का व्यवहार मर्यादा के अनुकूल होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि शिक्षकों के सामने गुटखा खाने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने जैसी बातें शिक्षक समाज के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाती हैं। संजीव कुमार ने यह भी जोड़ा कि राजनीति में शुरुआती दौर में नवल किशोर यादव को आगे बढ़ाने में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बड़ी भूमिका रही है।

अपने प्रचार अभियान को धार देते हुए राजद समर्थित उम्मीदवार ने 23 अक्टूबर को परिवर्तन दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि इस बार शिक्षक वर्ग अपने मान-सम्मान और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अपने मत का प्रयोग करेगा और एक बेहतर विकल्प चुनेगा। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही इस तरह के व्यक्तिगत और राजनीतिक हमलों ने मुकाबले को काफी आक्रामक बना दिया है।
चुनाव पर क्या पड़ेगा असर और आगे की स्थिति
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले इस चुनाव में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस बयानबाजी के बाद अब राजनीतिक दलों और विशेष रूप से नवल किशोर यादव के खेमे की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें हैं। देखना यह होगा कि इस तीखे आरोप के बाद चुनावी मैदान में अन्य प्रतिद्वंद्वी किस प्रकार की रणनीति अपनाते हैं और प्रशासनिक या राजनीतिक स्तर पर इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार प्रचार का दौर और तेज होने की उम्मीद है।





