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Bihar Panchayat Elections में ट्रिपल टेस्ट का पेंच, जानिए क्यों अटकी है प्रक्रिया और क्या है नया अपडेट

| Published: | Updated:
Bihar Panchayat Elections में ट्रिपल टेस्ट का पेंच, जानिए क्यों अटकी है प्रक्रिया और क्या है नया अपडेट
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मुख्य बातें

  • Bihar Panchayat Elections को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और उम्मीदवारों के मन में यह बड़ा सवाल है कि गांव की सरकार का गठन तय समय पर हो पाएगा या नहीं।
  • इस देरी के केंद्र में 'ट्रिपल टेस्ट' और परिसीमन की प्रक्रिया है, जो स्थानीय निकायों में ओबीसी और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक आरक्षण से जुड़ी हुई है।
  • न्यायिक दिशा-निर्देशों के चलते इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना चुनाव कराना कानूनी रूप से जटिल हो गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों की चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है।
  • पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में ट्रिपल टेस्ट की अहम भूमिका होती है।

खबर डोज़ ब्यूरो। Bihar Panchayat Elections को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और उम्मीदवारों के मन में यह बड़ा सवाल है कि गांव की सरकार का गठन तय समय पर हो पाएगा या नहीं। इस देरी के केंद्र में 'ट्रिपल टेस्ट' और परिसीमन की प्रक्रिया है, जो स्थानीय निकायों में ओबीसी और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक आरक्षण से जुड़ी हुई है। न्यायिक दिशा-निर्देशों के चलते इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना चुनाव कराना कानूनी रूप से जटिल हो गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों की चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है।

क्या है ट्रिपल टेस्ट और क्यों है जरूरी

पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में ट्रिपल टेस्ट की अहम भूमिका होती है। यह प्रक्रिया खास तौर पर पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए राजनीतिक आरक्षण तय करने से जुड़ी है। इसका उद्देश्य स्थानीय निकायों में इन वर्गों को उनकी स्थिति के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व दिलाना है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए तीन शर्तें निर्धारित की हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है।

Bihar Panchayat Elections में ट्रिपल टेस्ट का पेंच, जानिए क्यों अटकी है प्रक्रिया और क्या है नया अपडेट

ट्रिपल टेस्ट की पहली शर्त एक समर्पित आयोग का गठन करना है। राज्य सरकार को ऐसा आयोग बनाना होता है जो स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करे। दूसरी शर्त पिछड़ेपन से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन है, जिसके आधार पर यह पता चलता है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए किस तरह के आरक्षण की जरूरत है। तीसरी शर्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर आरक्षण की सीमा तय करना है, जिसमें कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक न होने का नियम भी शामिल है।

परिसीमन और कार्यकाल की स्थिति

बिहार में मामला केवल ट्रिपल टेस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव से पहले परिसीमन और आरक्षण निर्धारण जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी की जानी हैं। परिसीमन का अर्थ पंचायतों और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना है। इन सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में देरी होने से चुनाव की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार ने निर्धारित समय पर पंचायत चुनाव कराने में कठिनाई जताई है और ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया के लिए एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान को जिम्मेदारी देने का निर्णय सामने आया है।

Bihar Panchayat Elections में ट्रिपल टेस्ट का पेंच, जानिए क्यों अटकी है प्रक्रिया और क्या है नया अपडेट

राज्य में पंचायतों और ग्राम कचहरियों का मौजूदा कार्यकाल दिसंबर 2026 के मध्य से जनवरी 2027 के पहले सप्ताह के बीच समाप्त हो रहा है। अदालती मामलों और अगली सुनवाई के मद्देनजर इस पूरी प्रक्रिया पर प्रशासनिक और न्यायिक नजरें टिकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यदि निर्धारित समय तक ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो एससी-एसटी सीटों को छोड़कर अन्य सीटों को सामान्य श्रेणी में अधिसूचित करके भी चुनाव कराए जाने का विकल्प रहता है। फिलहाल ग्रामीण मतदाताओं और भावी प्रत्याशियों की निगाहें सरकार और आयोग के अगले आधिकारिक कदमों पर टिकी हैं।

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