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Patna Neet Case: : 30 लोगों का DNA टेस्ट, 8 महीने जांच के बाद भी CBI के हाथ क्यों खाली

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Patna Neet Case: : 30 लोगों का DNA टेस्ट, 8 महीने जांच के बाद भी CBI के हाथ क्यों खाली
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मुख्य बातें

  • पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विशेष पॉक्सो अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है।
  • आठ महीने की लंबी जांच और करीब 30 लोगों के डीएनए टेस्ट के बाद भी जांच एजेंसी किसी ठोस नतीजे या आरोपी तक पहुंचने में नाकाम रही, जिससे इस संवेदनशील मामले में इंसाफ की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
  • पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा अपने कमरे में अचेत अवस्था में पाई गई थी।
  • कमरा अंदर से बंद था और छात्रा की हालत बेहद नाजुक थी।

पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विशेष पॉक्सो अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। आठ महीने की लंबी जांच और करीब 30 लोगों के डीएनए टेस्ट के बाद भी जांच एजेंसी किसी ठोस नतीजे या आरोपी तक पहुंचने में नाकाम रही, जिससे इस संवेदनशील मामले में इंसाफ की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

घटनाक्रम की शुरुआत इस साल 6 जनवरी को हुई थी। पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा अपने कमरे में अचेत अवस्था में पाई गई थी। कमरा अंदर से बंद था और छात्रा की हालत बेहद नाजुक थी। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद पुलिस प्रशासन और हॉस्टल प्रबंधन में हड़कंप मच गया।

शुरुआती दौर में पुलिस इस मामले को सामान्य बीमारी या आत्महत्या के प्रयास के रूप में देख रही थी। लेकिन 9 जनवरी को छात्रा के पिता के बयान पर चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। पिता ने अपनी शिकायत में बेटी के शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी और दुष्कर्म के प्रयास की गंभीर आशंका जताई थी। इसके बाद मामले ने पूरी तरह से आपराधिक मोड़ ले लिया।

इलाज के दौरान 11 जनवरी को छात्रा ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद परिजनों और स्थानीय छात्रों का गुस्सा भड़क उठा। पुलिस की शुरुआती ढुलमुल जांच को लेकर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक तीखा विरोध प्रदर्शन हुआ। जनाक्रोश को देखते हुए तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (IG) जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसने मामले की जांच अपने हाथ में ली।

Patna Neet Case: : 30 लोगों का DNA टेस्ट, 8 महीने जांच के बाद भी CBI के हाथ क्यों खाली

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और स्पर्म मिलने का सनसनीखेज खुलासा

मामले में सबसे बड़ा मोड़ 15 जनवरी को आया, जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने की पुष्टि हुई और यौन हिंसा की आशंका को बल मिला। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि छात्रा के कपड़ों, विशेषकर उसके अंडरगारमेंट पर स्पर्म पाया गया था। इस वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने आने के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई।

इस मामले की जांच शुरू में चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी कर रही थीं। बाद में यौन शोषण की धाराओं के जुड़ने के बाद जांच सचिवालय के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO-1) डॉ. अनु कुमारी को सौंपी गई। पुलिस की कार्यशैली पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच, अदालत की कड़ी फटकार के बाद इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक दबाव को देखते हुए बिहार सरकार ने इसकी सिफारिश केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से करने का निर्णय लिया। सीबीआई ने 12 फरवरी को इस मामले को अपने हाथ में लिया और औपचारिक रूप से जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने पहले पवन कुमार और बाद में महिला अधिकारी विभा कुमारी को इस केस का जांच अधिकारी (IO) नियुक्त किया।

30 लोगों का डीएनए टेस्ट और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट

सीबीआई की टीम ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पटना के हॉस्टल से लेकर जहानाबाद में छात्रा के पैतृक आवास तक गहन पड़ताल की। छात्रा के कमरे से पढ़ाई की कॉपियां, किताबें, व्यक्तिगत डायरी, कपड़े और अन्य दस्तावेज सहित लगभग पांच बोरी सामग्री फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त की गई। इसके अलावा, इलाज करने वाले डॉक्टरों और थाने के पुलिसकर्मियों से भी लंबी पूछताछ की गई।

जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वैज्ञानिक साक्ष्यों का मिलान था। सीबीआई ने हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन, मृतका के करीबियों, हॉस्टल के कर्मचारियों और संदिग्धों सहित लगभग 30 लोगों के डीएनए (DNA) सैंपल लिए। इन सभी सैंपलों का मिलान छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म के डीएनए से कराया गया। हालांकि, फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में किसी भी व्यक्ति का डीएनए मैच नहीं हुआ।

Patna Neet Case: : 30 लोगों का DNA टेस्ट, 8 महीने जांच के बाद भी CBI के हाथ क्यों खाली

डीएनए मिलान न होने और किसी अन्य तकनीकी साक्ष्य के अभाव में सीबीआई ने आखिरकार विशेष पॉक्सो अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट सौंप दी। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता के पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। इसके साथ ही, छात्रा की मौत की वास्तविक वजह को लेकर भी कोई स्पष्ट और अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका है।

इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई थी, जिसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित कर दिया गया था। हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन ठोस सबूतों की कमी के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

सीबीआई द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने का यह मतलब नहीं है कि यह मामला पूरी तरह से बंद हो गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने मृतका के पिता को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। पीड़ित परिवार के पास सीबीआई की इस रिपोर्ट के खिलाफ अदालत में 'प्रोटेस्ट पिटीशन' (विरोध याचिका) दायर करने का कानूनी अधिकार सुरक्षित है, जिसके जरिए वे दोबारा जांच या किसी अन्य एजेंसी से जांच की मांग कर सकते हैं। अदालत इस मामले में सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर नए सिरे से जांच का आदेश भी दे सकती है।

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