बिहार की धरती प्रतिभाओं से भरी हुई है। छोटे-छोटे गांवों से निकलकर यहां के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। आज इस रिपोर्ट में आपको हम बताएंगे बिहार के सासाराम जिले के दिनारा प्रखंड के मनोहरपुर गांव के रहने वाले एक ऐसे ही होनहार खिलाड़ी अंशुमान तिवारी के बारे में, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर बिहार का नाम रोशन किया है। बिहार से पहले ऐसे युवा जिन्होंने रेसलिंग में नंबर एक पर आकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। अब अंशुमान का अगला लक्ष्य और भी बड़ा है। अगले महीने वह थाईलैंड में होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत और बिहार का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं।

सासाराम के दिनारा प्रखंड स्थित मनोहरपुर गांव के रहने वाले युवा खिलाड़ी अंशुमान तिवारी ने अपनी मेहनत, लगन और शानदार प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किया है। कुश्ती के क्षेत्र में उनकी इस बड़ी उपलब्धि से पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। अनशुमन तिवारी ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत और जुनून हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी देश के बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है।

राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में अनशुमन ने बिहार का प्रतिनिधित्व किया। कठिन मुकाबलों के बीच उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। उनकी इस सफलता के बाद अब उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पर टिकी हुई है।
अंशुमान तिवारी अगले महीने थाईलैंड में आयोजित होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे। यह सिर्फ अंशुमान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है कि सासाराम के एक गांव का बेटा अब विश्व स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है।

अंशुमान तिवारी की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अंशुमान के पिता स्वर्गीय अखिलेश्वर तिवारी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका सपना आज उनका बेटा पूरा कर रहा है। पिता के निधन के बाद अंशुमान के सामने चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने लक्ष्य को मजबूत बनाया।
उनकी मां आरती तिवारी ने बेटे के सपनों को हमेशा सहारा दिया और हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया। आज बेटे के राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने से मां का सिर गर्व से ऊंचा है।

अंशुमान तिवारी की यह उपलब्धि आज मनोहरपुर गांव के युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। एक साधारण गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतना और अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए थाईलैंड जाना आसान सफर नहीं है। इसके पीछे लगातार अभ्यास, अनुशासन और वर्षों की मेहनत शामिल है।
अंशुमान ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सही मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ गांव का एक युवा भी दुनिया के सामने अपनी पहचान बना सकता है।

मनोहरपुर गांव के अंशुमान तिवारी की उपलब्धि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब वह अगले महीने थाईलैंड में होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे। ऐसे में सभी की नजरें अंशुमान के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर टिकी हैं और उम्मीद है कि वह वहां भी शानदार प्रदर्शन कर देश और बिहार का नाम रोशन करेंगे।

सासाराम के मनोहरपुर गांव के अंशुमान तिवारी ने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार की मिट्टी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। पिता स्वर्गीय अखिलेश्वर तिवारी के सपनों और मां आरती तिवारी के संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए अब अंशुमान का अगला लक्ष्य विश्व स्तर पर गोल्ड जीतना है। अगले महीने थाईलैंड में होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन पूरे बिहार के लिए खास होने वाला है।





