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बिहार में लघु जल संसाधन विभाग के तीन इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का शिकंजा

| Published: | Updated:
बिहार में लघु जल संसाधन विभाग के तीन इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का शिकंजा
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मुख्य बातें

  • बिहार में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और कामकाज में अनियमितता को लेकर राज्य सरकार का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।
  • लघु जल संसाधन विभाग से जुड़े तीन वरिष्ठ इंजीनियरों के खिलाफ गंभीर आरोपों के मामलों में बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
  • एक तरफ जहां आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एक अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ दो अन्य इंजीनियरों के खिलाफ सरकारी निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितता को लेकर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है।
  • इन सभी मामलों की गहराई से जांच के लिए इसे मुख्य जांच आयुक्त, बिहार को सौंपा गया है।सबसे बड़ी कार्रवाई छपरा में तैनात तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेन्द्र कुमार के खिलाफ की गई है।
पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और कामकाज में अनियमितता को लेकर राज्य सरकार का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। लघु जल संसाधन विभाग से जुड़े तीन वरिष्ठ इंजीनियरों के खिलाफ गंभीर आरोपों के मामलों में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एक तरफ जहां आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एक अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ दो अन्य इंजीनियरों के खिलाफ सरकारी निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितता को लेकर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। इन सभी मामलों की गहराई से जांच के लिए इसे मुख्य जांच आयुक्त, बिहार को सौंपा गया है।

सबसे बड़ी कार्रवाई छपरा में तैनात तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेन्द्र कुमार के खिलाफ की गई है। विशेष निगरानी इकाई की जांच में पाया गया कि उनके पास उनकी वैध आय से करीब 3.02 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति है। निगरानी एजेंसी के मुताबिक, राजेन्द्र कुमार के पास उनकी ज्ञात आय की तुलना में 3,01,87,108 रुपये अधिक की संपत्ति होने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जो उनकी वैध आय से लगभग 102.03 प्रतिशत अधिक बैठती है। इस गंभीर मामले में विशेष निगरानी इकाई द्वारा 10 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी की जानकारी मिलने के अगले ही दिन, यानी 11 सितंबर को लघु जल संसाधन विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

बिहार में लघु जल संसाधन विभाग के तीन इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का शिकंजा

टेंडर प्रक्रिया और बांध जीर्णोद्धार में गड़बड़ी के आरोप

भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई संपत्ति के बजाय सरकारी निर्माण कार्य की निविदा प्रक्रिया से जुड़ी है। भागलपुर के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार सिंह और बांका के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता विजय कुमार वर्मा के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई का आदेश दिया गया है। इन दोनों अधिकारियों पर हेथ चन्दन बांध के जीर्णोद्धार कार्य की निविदा के निष्पादन में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी करने और अनियमितता बरतने का गंभीर आरोप है। विभाग ने इस मामले को भी बेहद गंभीरता से लिया है। संजीव कुमार सिंह और विजय कुमार वर्मा के खिलाफ शुरू की गई इन अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की जांच की जिम्मेदारी भी मुख्य जांच आयुक्त, बिहार, पटना को दी गई है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि टेंडर प्रक्रिया के किस चरण में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं और इसमें इन अधिकारियों की व्यक्तिगत भूमिका क्या रही थी।

एक तरफ करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति का मामला और दूसरी तरफ बांध के जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण कार्य में टेंडर की पारदर्शिता पर लगे सवाल, इन तीनों घटनाओं ने प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। विभाग और जांच एजेंसियों की इस दोहरी कार्रवाई के बाद सरकारी महकमों में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल तीनों मामलों में मुख्य जांच आयुक्त के स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इन अधिकारियों पर अगली बड़ी विभागीय या विधिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।

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