गोवा (खबर डोज़ ब्यूरो) दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ने और बेहोश होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक उनकी मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है। उनके निधन से फिल्म जगत और प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।
नाना पाटेकर अपने दमदार अभिनय और बेबाक अंदाज के लिए हमेशा जाने जाते रहे हैं। पर्दे पर उनके निभाए गए किरदार दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ चुके हैं। अभिनय के अलावा वह सामाजिक सरोकारों और किसानों के मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखते थे। उनका जुड़ाव सिर्फ फिल्मी सेट तक सीमित नहीं था, बल्कि वह आम जनजीवन और ग्रामीण संस्कृति से भी गहराई से जुड़े हुए थे।
बिहार से जुड़ाव और खास यादें
नाना पाटेकर का बिहार के साथ भी गहरा और यादगार नाता रहा है। जून 2020 में वह दो दिवसीय दौरे पर बिहार आए थे। इस दौरान उन्होंने मोकामा स्थित सीआरपीएफ कैंप का दौरा किया था और आर्मी की वर्दी में जवानों का हौसला बढ़ाया था। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों के चर्चित संवाद भी सुनाए थे, जिससे वहां का माहौल बेहद खुशनुमा हो गया था। जवानों के काम और उनकी जिम्मेदारियों के प्रति उन्होंने हमेशा सम्मान व्यक्त किया था।
मोकामा के औंटा गांव में उनका एक अलग और देसी रूप देखने को मिला था। वहां उन्होंने किसानों के बीच वक्त बिताया, खेती-किसानी को करीब से समझा और खुद खेत में उतरकर हल चलाया था। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय खादी भंडार में जाकर करघा भी चलाया था। उनके इस सहज और जमीन से जुड़े अंदाज ने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया था।

सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से की थी मुलाकात
अपने इसी बिहार दौरे के दौरान नाना पाटेकर राजधानी पटना भी पहुंचे थे। उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के राजीव नगर स्थित आवास पर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने सुशांत की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए और उनके पिता केके सिंह से मिलकर गहरी संवेदना जताई थी। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की थी, लेकिन उनका यह संवेदनशील कदम काफी चर्चा में रहा था।

फिल्म इंडस्ट्री के तमाम कलाकारों और उनके चाहने वालों ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पर्दे के बाहर एक संवेदनशील इंसान और किसानों के हितैषी के रूप में उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।





