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बिहार में लगातार बढ़ रहे बच्चों के लापता होने के मामले

| Published: | Updated:
बिहार में लगातार बढ़ रहे बच्चों के लापता होने के मामले
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मुख्य बातें

  • बिहार में बच्चों के लापता होने के आंकड़े लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
  • राज्य में हर दिन औसतन 40 से ज्यादा बच्चे अपने घरों से गायब हो रहे हैं, जिनमें आधे से अधिक संख्या किशोरियों और लड़कियों की है।
  • पुलिस मुख्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक बच्चों की इस गुमशुदगी के पीछे न केवल घरेलू परेशानियां बल्कि मानव तस्करी, जबरन शादी और शोषण के गंभीर पहलू भी जुड़े हुए हैं, जिससे परिवारों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
  • पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में बिहार में बच्चों की गुमशुदगी के कुल 14 हजार 699 मामले दर्ज किए गए थे।

पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में बच्चों के लापता होने के आंकड़े लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। राज्य में हर दिन औसतन 40 से ज्यादा बच्चे अपने घरों से गायब हो रहे हैं, जिनमें आधे से अधिक संख्या किशोरियों और लड़कियों की है। पुलिस मुख्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक बच्चों की इस गुमशुदगी के पीछे न केवल घरेलू परेशानियां बल्कि मानव तस्करी, जबरन शादी और शोषण के गंभीर पहलू भी जुड़े हुए हैं, जिससे परिवारों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

बिहार में लगातार बढ़ रहे बच्चों के लापता होने के मामले

साल दर साल बढ़ रहे गुमशुदगी के आंकड़े और लड़कियों की स्थिति

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में बिहार में बच्चों की गुमशुदगी के कुल 14 हजार 699 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें लगभग 8 हजार 600 लड़कियां शामिल थीं, यानी कुल लापता बच्चों में लड़कियों की हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा थी। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 में केवल जून महीने तक ही 10 हजार 577 बच्चों के गायब होने के मामले सामने आ चुके थे, जिनमें करीब 6 हजार 700 लड़कियां शामिल थीं।

दूसरी ओर बरामदगी के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2025 में पुलिस ने कुल 7 हजार 772 बच्चों को खोज निकाला, जिसमें 1 हजार 205 लड़के और 6 हजार 567 लड़कियां थीं। वहीं साल 2026 में जून तक 5 हजार 232 बच्चों की बरामदगी हुई, जिसमें 868 लड़के और 4 हजार 364 लड़कियां शामिल रहीं। आंकड़ों से साफ है कि बरामद होने वाले बच्चों में भी लड़कियों की संख्या काफी ज्यादा है।

बिहार में लगातार बढ़ रहे बच्चों के लापता होने के मामले

जांच में सामने आई तस्करी और शोषण की आशंका

पुलिस की शुरुआती जांच कई मामलों में बेहद चौंकाने वाली रही है। खासकर गरीब परिवारों की किशोरियों को नौकरी या शादी का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाने के मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में इन्हें घरेलू काम के लिए या बंधुआ मजदूरी जैसी स्थितियों में धकेले जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जबरन शादी, यौन शोषण और भिक्षावृत्ति जैसे गंभीर अपराधों से भी इन गुमशुदगी के मामलों का कनेक्शन जुड़ा हुआ है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि बच्चों के लापता होने के मामलों में बढ़ोतरी की एक वजह पुलिस व्यवस्था में हुआ वह बदलाव भी है, जिसके तहत बच्चे के गायब होने के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे अब ज्यादातर मामले आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो रहे हैं। हालांकि शुरुआती गोल्डन आवर में तेजी से कार्रवाई न होने को लेकर भी परिवारों की तरफ से शिकायतें सामने आती रही हैं।

बिहार में लगातार बढ़ रहे बच्चों के लापता होने के मामले

मिशन वात्सल्य पोर्टल के जरिए अपनों तक पहुंच रहे बच्चे

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए बिहार पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। बिहार पुलिस 'मिशन वात्सल्य पोर्टल' के माध्यम से देशभर में बरामद होने वाले बिहार के बच्चों की पहचान और उनके परिजनों से मिलान का विशेष अभियान चला रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस पोर्टल की मदद से अब तक 6 हजार 857 बच्चों को तलाशा गया है, जबकि 4 हजार 273 बच्चों का उनके परिवारों से सफलतापूर्वक मिलान कराया जा चुका है।

लापता और बरामद बच्चों का पूरा विवरण इस पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिससे उनकी पहचान और परिवार तक वापसी की प्रक्रिया आसान हो सके। इसके अलावा शादी की नीयत से अपहरण किए गए मामलों का भी अलग से सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन और सामाजिक संगठनों का यही कहना है कि किसी भी बच्चे के लापता होने पर परिजनों को इंतजार करने के बजाय तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती कुछ घंटे बच्चों की सुरक्षित तलाश के लिए सबसे अहम होते हैं।

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