बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है। हाल के प्रदर्शनों के दौरान हुई गोलीबारी की घटनाओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव जल्द ही दिल्ली का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं से होने की चर्चा है।
दरअसल, बिहार के जहानाबाद और सीवान में प्रदर्शन के दौरान हुई गोलीबारी की घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को काफी गरमा दिया है। इन घटनाओं को लेकर तेजस्वी यादव लगातार सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान गोली चलने की घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
तेजस्वी यादव पहले ही विपक्षी नेताओं से अपील कर चुके हैं कि वे बिहार पहुंचें और प्रभावित परिवारों से मुलाकात करें। अब अगर दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ उनकी बैठक होती है, तो माना जा रहा है कि बिहार की मौजूदा कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हालात पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव दिल्ली में विपक्ष के कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। बैठक में सिर्फ हाल की गोलीबारी की घटनाएं ही नहीं, बल्कि बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आने वाले दिनों की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है। यही वजह है कि तेजस्वी यादव का संभावित दिल्ली दौरा बिहार की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि अगर विपक्षी दलों के बीच किसी संयुक्त रणनीति पर सहमति बनती है, तो आने वाले दिनों में बिहार में बड़ा राजनीतिक आंदोलन देखने को मिल सकता है। विपक्षी सांसदों और नेताओं के बिहार आने और प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि, यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है कि अभी तक विपक्ष की ओर से किसी बड़े आंदोलन की तारीख, कार्यक्रम या आधिकारिक रूपरेखा की घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित रणनीति और राजनीतिक तैयारियों के तौर पर ही देखा जा रहा है। वहीं, सूत्रों का दावा है कि 19 अगस्त के बाद बिहार के राजनीतिक माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगर तेजस्वी यादव की दिल्ली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ बैठक होती है और उसके बाद कोई साझा रणनीति सामने आती है, तो बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विपक्ष बिहार में किसी बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है? क्या दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक के बाद विपक्षी नेता एक साथ बिहार का रुख करेंगे? और क्या जहानाबाद और सीवान की घटनाएं आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनेंगी?फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है। लेकिन इतना जरूर है कि तेजस्वी यादव के संभावित दिल्ली दौरे ने बिहार की सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। अगर विपक्षी दल एकजुट होकर सड़क पर उतरते हैं, तो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है।





