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बाढ़ भी नहीं डिगा सकी हौसला: 5 फीट पानी में डूबा मैदान, भागलपुर में सड़कों और नावों पर सेना-दरोगा भर्ती की तैयारी

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बाढ़ भी नहीं डिगा सकी हौसला: 5 फीट पानी में डूबा मैदान, भागलपुर में सड़कों और नावों पर सेना-दरोगा भर्ती की तैयारी
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मुख्य बातें

  • बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण सेना और मद्य निषेध दरोगा भर्ती की शारीरिक परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं का मुख्य प्रशिक्षण मैदान चार से पांच फीट तक बाढ़ के पानी में डूब गया है।
  • इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद, अभ्यर्थी और उनके प्रशिक्षक वैकल्पिक सूखे स्थानों और सड़कों पर अपनी कठिन शारीरिक दक्षता परीक्षा का अभ्यास जारी रखने को मजबूर हैं।
  • भागलपुर के निचले और दियारा क्षेत्रों में गंगा नदी के उफान पर होने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।
  • विशेष रूप से, शहर का प्रसिद्ध सैंडिस कंपाउंड मैदान और अन्य पारंपरिक अभ्यास स्थल बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुके हैं।

बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण सेना और मद्य निषेध दरोगा भर्ती की शारीरिक परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं का मुख्य प्रशिक्षण मैदान चार से पांच फीट तक बाढ़ के पानी में डूब गया है। इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद, अभ्यर्थी और उनके प्रशिक्षक वैकल्पिक सूखे स्थानों और सड़कों पर अपनी कठिन शारीरिक दक्षता परीक्षा का अभ्यास जारी रखने को मजबूर हैं।

बाढ़ भी नहीं डिगा सकी हौसला: 5 फीट पानी में डूबा मैदान, भागलपुर में सड़कों और नावों पर सेना-दरोगा भर्ती की तैयारी

बाढ़ का संकट और प्रशिक्षण मैदानों की वर्तमान स्थिति

भागलपुर के निचले और दियारा क्षेत्रों में गंगा नदी के उफान पर होने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। विशेष रूप से, शहर का प्रसिद्ध सैंडिस कंपाउंड मैदान और अन्य पारंपरिक अभ्यास स्थल बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुके हैं। मैदानों में वर्तमान में 4 से 5 फीट तक पानी भरा हुआ है, जिससे रनिंग ट्रैक, हाई जंप, लॉन्ग जंप और गोला फेंक के लिए बनाए गए विशेष कोर्ट पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। गंगा नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण भागलपुर के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। दियारा क्षेत्र के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे वहां के युवाओं को अपनी दैनिक गतिविधियों के साथ-साथ करियर से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में भारी कठिनाई हो रही है। सेना भर्ती और मद्य निषेध दरोगा परीक्षा के लिए निर्धारित शारीरिक मानकों, जैसे कि 1600 मीटर की दौड़ को एक निश्चित समय सीमा में पूरा करना, ऊंची कूद और लंबी कूद के लिए विशेष रूप से तैयार की गई नरम मिट्टी की आवश्यकता होती है। जब मुख्य मैदान पानी में डूब जाते हैं, तो कंक्रीट की सड़कों पर दौड़ने से अभ्यर्थियों के पैरों में गंभीर चोटें आने का खतरा बढ़ जाता है, जो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकता है।

बाढ़ भी नहीं डिगा सकी हौसला: 5 फीट पानी में डूबा मैदान, भागलपुर में सड़कों और नावों पर सेना-दरोगा भर्ती की तैयारी

वैकल्पिक व्यवस्था और तकनीकी प्रशिक्षण का प्रशासनिक ढांचा

शारीरिक दक्षता परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण कारक होती है। मैदानों के डूबने के बाद, पूर्व पैरा कमांडो और प्रशिक्षक रणजीत सोलंकी के मार्गदर्शन में अभ्यर्थियों ने प्रशिक्षण की रणनीति में बदलाव किया है।

सुरक्षित और वैकल्पिक स्थानों पर अभ्यास का संचालन

बाढ़ के इस संकट काल में प्रशिक्षकों द्वारा निम्नलिखित रणनीतियों के तहत युवाओं को तैयार किया जा रहा है:

  • वैकल्पिक ट्रैक का चयन: मुख्य मैदानों के अनुपलब्ध होने पर ऊंचे राष्ट्रीय राजमार्गों, संपर्क सड़कों के सूखे हिस्सों और सुरक्षित ऊंचे मैदानों को अस्थायी रनिंग ट्रैक के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
  • स्ट्रेंथ और एंड्यूरेंस ट्रेनिंग: कार्डियोवैस्कुलर क्षमता बनाए रखने के लिए बिना मैदान के की जाने वाली शारीरिक कसरतों और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
  • सुरक्षा मानकों का पालन: पक्की सड़कों पर दौड़ने से घुटनों और टखनों में होने वाली इंजरी से बचाने के लिए प्रशिक्षक विशेष एहतियात बरत रहे हैं और कंक्रीट की जगह मिट्टी वाले सूखे पैच तलाश रहे हैं।

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युवाओं का संकल्प और सामाजिक-आर्थिक सरोकार

बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सरकारी नौकरी, विशेषकर रक्षा सेवाओं और पुलिस बल में भर्ती, केवल एक रोजगार का साधन नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा का मुख्य जरिया है। सेना भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी अभिमन्यु कुमार सिंह जैसे सैकड़ों युवाओं के लिए यह परीक्षा उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है। बिहार के युवाओं के लिए सेना और पुलिस विभाग की नौकरियां केवल एक करियर विकल्प नहीं हैं, बल्कि यह उनके परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने का एक सशक्त माध्यम हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के माता-पिता अपनी सीमित आय में से पैसे बचाकर इन युवाओं को कोचिंग और शारीरिक प्रशिक्षण के लिए शहर भेजते हैं। ऐसे में, यदि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण अभ्यास बाधित होता है, तो इसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर पड़ता है। अभ्यर्थी अभिमन्यु कुमार सिंह ने बताया कि सैंडिस कंपाउंड जैसे बड़े मैदानों में अभ्यास करने से उन्हें वास्तविक परीक्षा जैसा माहौल मिलता था, लेकिन अब उन्हें संकरी गलियों और सड़कों पर दौड़कर ही संतोष करना पड़ रहा है, जहां वाहनों के आवागमन के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

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प्रशासनिक सहयोग और आगामी विभागीय प्रक्रिया

इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्थानीय प्रशासन और खेल विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि वर्तमान में युवा अपने स्तर पर और निजी प्रशिक्षकों के सहयोग से अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए स्थायी खेल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही है। आगामी दिनों में गंगा के जलस्तर में कमी आने और बाढ़ का पानी उतरने के बाद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा मैदानों की सफाई, कीटनाशकों के छिड़काव और रनिंग ट्रैक को दोबारा सुखाने व समतल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अभ्यर्थी और खेल संघ उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासनिक स्तर पर मैदानों को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा ताकि शारीरिक परीक्षा से पहले युवा अपने मुख्य ट्रैक पर अंतिम अभ्यास पूरा कर सकें।

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