करोड़ों की शराब पर चला बुलडोजर: 69 मामलों में जब्त 7,500 लीटर देसी-विदेशी शराब नष्ट
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से अवैध शराब के कारोबार, परिवहन और उपभोग पर रोक लगाना प्रशासनिक मशीनरी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। इसी क्रम में गोपालगंज जिले में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग तथा स्थानीय पुलिस द्वारा अवैध शराब के विरुद्ध सघन अभियान चलाया गया, जिसके तहत 69 प्राथमिकियों से जुड़ी लगभग 7,500 लीटर शराब को नष्ट किया गया। यह पूरी कार्रवाई बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के तहत निर्धारित विधिक प्रक्रियाओं का स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें जब्ती से लेकर निस्तारण तक के कड़े नियम शामिल हैं।

विनष्टीकरण के निर्धारित चरण
- नमूना संग्रह एवं फॉरेंसिक जांच: विधिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए जब्ती के तुरंत बाद शराब के नमूने रासायनिक परीक्षण हेतु भेजे जाते हैं।
- सक्षम प्राधिकारी का आदेश: अधिनियम की धारा 58 के तहत जिला दंडाधिकारी या अधिकृत उत्पाद समाहर्ता के आदेश के बाद ही विनष्टीकरण शुरू होता है।
- मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति: प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी की सीधी देखरेख में प्रक्रिया पूरी की जाती है।
- वीडियोग्राफी और पंचनामा: संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है और जब्ती सूची के मिलान के बाद दस्तावेज तैयार किए जाते हैं।
भौगोलिक चुनौतियाँ और स्थल प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण गोपालगंज जिला शराब तस्करों के लिए एक संवेदनशील पारगमन मार्ग रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन को बहुस्तरीय रणनीतियों का सहारा लेना पड़ता है। उत्पाद अधीक्षक अमृतेश कुमार झा के नेतृत्व में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस विनष्टीकरण को सबेया एयरपोर्ट परिसर और बलथरी चेक पोस्ट पर अंजाम दिया गया। खुले मैदान में गड्ढा खोदकर जेसीबी मशीनों द्वारा कांच और प्लास्टिक की बोतलों को कुचला गया, ताकि तरल शराब का पुन: उपयोग या रिसाव न हो सके। तस्कर अक्सर दूध के टैंकरों, खाद्यान्न ढोने वाले ट्रकों और एम्बुलेंस के अंदर गुप्त केबिन बनाकर तस्करी का प्रयास करते हैं, जिन्हें रोकने के लिए ड्रोन कैमरों और 24 घंटे नाकाबंदी का उपयोग किया जा रहा है।
आगामी विभागीय कदम व स्पीडी ट्रायल
शराब की खेप नष्ट किए जाने के बाद अब विभाग का पूरा ध्यान दर्ज 69 मामलों में आरोपियों को कानूनी सजा दिलाने पर केंद्रित है। इसके लिए जब्त नमूनों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और पंचनामे को संलग्न कर संबंधित न्यायालयों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर आरोप पत्र समर्पित किए जा रहे हैं। चिन्हित आदतन तस्करों और संगठित गिरोहों के विरुद्ध विशेष उत्पाद अदालतों के माध्यम से स्पीडी ट्रायल चलाने की रूपरेखा तैयार की गई है। साथ ही, अधिनियम के प्रावधानों के तहत तस्करी में प्रयुक्त वाहनों की नीलामी की जा रही है और अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करने के लिए विधिक प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।






