भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने, कौआ पुल के बंद होने और हालिया बाढ़ के कारण भागलपुर बायपास टोल प्लाजा पर वाहनों का आवागमन ठप होने से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। भारी वाहनों के मार्ग परिवर्तन के कारण इस टोल प्लाजा का दैनिक अनुबंध मूल्य 6.25 लाख रुपये से घटकर महज 1.30 लाख रुपये प्रतिदिन रह गया है, जिससे सरकारी राजस्व और निजी एजेंसी दोनों को करोड़ों की चपत लगी है।

विक्रमशिला सेतु क्षति और बाढ़ की दोहरी मार: राजस्व में ऐतिहासिक गिरावट
भागलपुर बायपास टोल प्लाजा के वित्तीय संकट की शुरुआत 3 मई को हुई, जब उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके तुरंत बाद सुरक्षा कारणों से भारी वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। इस प्रतिबंध के कारण टोल प्लाजा के दैनिक राजस्व में सीधे 79.2 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
इस संकट के बीच गंगा और कोसी नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया। बाढ़ के कारण स्थानीय और क्षेत्रीय संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए, जिससे बचे-खुचे हल्के वाहनों का आवागमन भी ठप हो गया। इस प्राकृतिक आपदा के चलते पहले से घटे हुए टोल कलेक्शन में 38.46 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि टोल प्लाजा पर 24 घंटे में बमुश्किल 80 हजार रुपये की ही वास्तविक वसूली हो पा रही है।

टोल अनुबंध का गणित: 6.25 लाख से 1.30 लाख रुपये पर सिमटा राजस्व
इस टोल प्लाजा के संचालन का जिम्मा मुंबई की एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी के पास है। नवंबर माह में हुए मूल समझौते के तहत एजेंसी को एनएचएआई को प्रतिदिन 6.25 लाख रुपये का भुगतान करना था। लेकिन विक्रमशिला सेतु पर भारी वाहनों का पहिया थमते ही एजेंसी को रोजाना करीब पांच लाख रुपये का सीधा नुकसान होने लगा, जिसके बाद मई में एजेंसी ने अनुबंध सरेंडर करने की लिखित पेशकश कर दी थी।

एजेंसी और एनएचएआई के बीच वित्तीय समायोजन
एजेंसी को पूरी तरह दिवालिया होने से बचाने और टोल संचालन को सुचारू रखने के लिए एनएचएआई ने प्रशासनिक कदम उठाए:
- जून माह में सिंगल बिड आने पर एजेंसी को अस्थायी विस्तार दिया गया।
- जुलाई में जारी नए अल्पकालिक टेंडर में एसएस मल्टीसर्विस ने ही 1.30 लाख रुपये प्रतिदिन की सर्वाधिक बोली लगाकर संचालन अपने पास रखा।
- यह नया अनुबंध आगामी नवंबर माह तक के लिए प्रभावी है, जिससे एनएचएआई को मिलने वाले दैनिक राजस्व में करीब 5 लाख रुपये की सीधी कटौती हुई है।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह कटौती वाहन चालकों से वसूले जाने वाले टोल शुल्क की दरों में नहीं, बल्कि एजेंसी द्वारा एनएचएआई को दिए जाने वाले अनुबंध मूल्य में की गई है।
यातायात डायवर्जन और बहाली की प्रशासनिक चुनौतियां
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मनीष कुमार के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने और कौआ पुल के बंद होने से भारी वाहनों को पूरी तरह से वैकल्पिक और लंबे मार्गों पर डायवर्ट कर दिया गया है। इसके तुरंत बाद आई बाढ़ ने स्थानीय परिवहन को भी न्यूनतम स्तर पर ला दिया है, जिससे बायपास पर वाहनों की संख्या नगण्य हो गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जब तक विक्रमशिला सेतु का सुदृढ़ीकरण और पुनर्स्थापन कार्य पूरा नहीं हो जाता और भारी वाहनों का परिचालन सामान्य नहीं होता, तब तक भागलपुर बायपास टोल प्लाजा के राजस्व में सुधार की कोई संभावना नहीं है। विभाग अब सेतु के तकनीकी आकलन और मरम्मत कार्य को गति देने की दिशा में काम कर रहा है ताकि इस महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।





