बिहार के जमुई और समस्तीपुर जिलों में लड़कियों के साथ सरेराह छेड़खानी के वीडियो वायरल होने के बाद सूबे के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस मामले में सरकार को बदनाम करने की साजिश की आशंका जताई है। मंत्री ने पुलिस प्रशासन से इन आपराधिक घटनाओं की तहकीकात के साथ-साथ वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले तत्वों की मंशा की भी गहन जांच करने की मांग की है।
छेड़खानी के वायरल वीडियो और मंत्री का 'साजिश' वाला तर्क
बिहार सरकार के मंत्री और भारतीय पाना पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल ने जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक कोण सामने रखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई अपराधी किसी महिला या लड़की के साथ छेड़खानी जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम देता है, तो वह स्वयं उस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर क्यों साझा करेगा। मंत्री के अनुसार, इस बात की प्रबल आशंका है कि वर्तमान राज्य सरकार की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से इन वीडियो को रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर वायरल किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां एक तरफ मुख्य आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस को इस डिजिटल प्रसार के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों और उनके उद्देश्यों का भी पता लगाना चाहिए।
जमुई-समस्तीपुर की घटनाएं और कानूनी ढांचा
बीते दिनों जमुई और समस्तीपुर जिलों से दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए थे, जिनमें असामाजिक तत्वों द्वारा राह चलती लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार और छेड़खानी करते देखा गया। इन संवेदनशील मामलों का संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू की है और आरोपियों की पहचान के लिए तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया जा रहा है। भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान हैं:
- महिला सुरक्षा से जुड़ी धाराएं: महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सार्वजनिक स्थान पर उत्पीड़न करने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है।
- आईटी एक्ट की धारा 67: किसी भी आपत्तिजनक या पीड़ित की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करना कानूनन अपराध है, जिसके तहत कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
- पुलिस की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): ऐसे मामलों में पुलिस सबसे पहले वीडियो की सत्यता और उसके मूल स्रोत का पता लगाती है ताकि अफवाह फैलाने वालों पर नकेल कसी जा सके।
पटना गोलीबारी कांड और कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक रार
इस बीच, राजधानी पटना में पूर्व पार्षद अनिल यादव को गोली मारे जाने की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर विपक्ष को हमलावर होने का एक और मौका दे दिया है। इस मुद्दे पर बोलते हुए मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि हर आपराधिक घटना को सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था की विफलता से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि कुछ अपराध आपसी रंजिश, भूमि विवाद या व्यक्तिगत कारणों से होते हैं, और अनिल यादव पर हुआ हमला भी आपसी विवाद का ही परिणाम प्रतीत होता है। विपक्ष द्वारा सरकार के 'इकबाल' और 'सुशासन' पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है और सभी दर्ज मामलों में त्वरित गिरफ्तारियां सुनिश्चित की जा रही हैं।
डिजिटल साक्ष्य और जांच की अगली प्रशासनिक दिशा
गृह विभाग के प्रशासनिक नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी आपराधिक वीडियो की जांच के लिए साइबर सेल को विशेष निर्देश दिए गए हैं। पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत, वीडियो वायरल करने वाले प्राथमिक खातों की पहचान की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो केवल घटना को उजागर करने के लिए साझा किया गया था या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है। आने वाले दिनों में जमुई और समस्तीपुर पुलिस द्वारा न्यायालय में दाखिल की जाने वाली चार्जशीट में इन डिजिटल साक्ष्यों को मुख्य आधार बनाया जाएगा, जिससे आरोपियों को त्वरित सुनवाई के जरिए सजा दिलाई जा सके।





