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Bihar New DGP Selection: बिहार के नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया शुरू, इन वरिष्ठ IPS अफसरों के नाम रेस में सबसे आगे

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Bihar New DGP Selection: बिहार के नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया शुरू, इन वरिष्ठ IPS अफसरों के नाम रेस में सबसे आगे
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मुख्य बातें

  • बिहार सरकार के गृह विभाग ने राज्य के अगले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चयन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू करते हुए पात्र वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है।
  • वर्तमान डीजीपी विनय कुमार का कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रहा है, जिसके मद्देनजर नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के साथ मिलकर तीन सदस्यीय अंतिम पैनल तैयार करने की कवायद तेज हो गई है।
  • बिहार पुलिस के नए मुखिया के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से स्थापित प्रशासनिक और कानूनी नियमों के तहत संचालित की जा रही है।
  • देश में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

बिहार सरकार के गृह विभाग ने राज्य के अगले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चयन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू करते हुए पात्र वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है। वर्तमान डीजीपी विनय कुमार का कार्यकाल 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रहा है, जिसके मद्देनजर नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के साथ मिलकर तीन सदस्यीय अंतिम पैनल तैयार करने की कवायद तेज हो गई है।

Bihar New DGP Selection: बिहार के नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया शुरू, इन वरिष्ठ IPS अफसरों के नाम रेस में सबसे आगे

डीजीपी चयन की वैधानिक प्रक्रिया और यूपीएससी की भूमिका

बिहार पुलिस के नए मुखिया के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से स्थापित प्रशासनिक और कानूनी नियमों के तहत संचालित की जा रही है। देश में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार उन सभी पात्र अधिकारियों के नाम केंद्र सरकार को भेजती है जिन्होंने पुलिस सेवा में एक निश्चित अवधि पूरी कर ली है। इस मामले में, बिहार गृह विभाग द्वारा भेजी गई सूची में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई है जिन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में अपनी 30 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।

गृह मंत्रालय को सूची प्राप्त होने के बाद, अगला महत्वपूर्ण चरण संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के साथ उच्च स्तरीय बैठक का होता है। यूपीएससी की एक विशेष समिति राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों की स्क्रूटनी करती है। इस स्क्रूटनी के दौरान अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, उनके खिलाफ लंबित किसी भी विभागीय या कानूनी जांच, उनके वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) और उनके प्रशासनिक अनुभव का गहन विश्लेषण किया जाता है। इस मूल्यांकन के बाद, यूपीएससी और केंद्रीय गृह मंत्रालय मिलकर तीन सबसे योग्य अधिकारियों का एक पैनल तैयार करते हैं। यह तीन नामों का पैनल वापस राज्य सरकार को भेजा जाता, जिसके बाद मुख्यमंत्री के पास इन तीन में से किसी एक अधिकारी को राज्य का डीजीपी नियुक्त करने का विशेषाधिकार होता है।

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वरिष्ठता और अनुभव की दौड़: प्रमुख दावेदार और उनके प्रशासनिक प्रोफाइल

बिहार के अगले पुलिस महानिदेशक की दौड़ में कई वरिष्ठ और अनुभवी आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इस सूची में डीजी रैंक के अधिकारियों के साथ-साथ 1995 और 1996 बैच के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) स्तर के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। चयन प्रक्रिया में वरिष्ठता के साथ-साथ अधिकारियों के पास उपलब्ध सेवा अवधि और उनके पिछले प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड को भी समान महत्व दिया जाएगा।

डीजी रैंक के सबसे वरिष्ठ दावेदार

दावेदारों की सूची में सबसे पहला और वरिष्ठ नाम 1991 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा का है। प्रीता वर्मा वर्तमान में महानिदेशक (डीजी) होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाएं के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं और वरिष्ठता सूची में उनका स्थान सबसे ऊपर है। उनके बाद 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी बी. श्रीनिवासन का नाम आता है, जो वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) में तैनात हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर डीजीपी बनाए जाने की प्रशासनिक परंपराओं के तहत उनकी दावेदारी को भी बेहद गंभीर माना जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, 1993 बैच के दो वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौड़ में मजबूती से शामिल हैं। इनमें जितेन्द्र सिंह गंगवार वर्तमान में डीजी निगरानी (विजिलेंस) के पद पर तैनात हैं, जिनके पास राज्य में भ्रष्टाचार निरोधक अभियानों का लंबा अनुभव है। इसी बैच के दूसरे अधिकारी जितेन्द्र कुमार भी डीजी स्तर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनकी प्रशासनिक पकड़ को भी विभाग में सराहा जाता है।

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1994 बैच के अधिकारियों की मजबूत दावेदारी

डीजीपी पद की इस प्रशासनिक रेस में 1994 बैच के अधिकारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैच में कुंदन कृष्णन का नाम विशेष रूप से चर्चा में है, जिनकी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मजबूत छवि रही है। उनके अलावा इसी बैच के दो अन्य प्रमुख अधिकारी इस प्रकार हैं:

  • डॉ. परेश सक्सेना: वर्तमान में डीजी सिविल डिफेंस के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, उनका कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त होने वाला है, जिससे अंतिम पैनल में उनकी सेवा अवधि के तकनीकी पहलू पर विचार किया जाएगा।
  • निर्मल कुमार आजाद: डीजी स्तर के इस अधिकारी का कार्यकाल दिसंबर 2027 तक है, जो उन्हें सेवा अवधि के मामले में एक मजबूत प्रशासनिक लाभ प्रदान करता है।

1995-96 बैच के एडीजी और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारी

चयन प्रक्रिया को व्यापक और पारदर्शी बनाने के लिए गृह विभाग ने 1995 और 1996 बैच के कई प्रतिभावान एडीजी स्तर के अधिकारियों के नामों को भी सूची में शामिल किया है। इन अधिकारियों ने राज्य के विभिन्न जिलों और विभागों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इस श्रेणी में शामिल प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:

  • आर. मलार विजि, पंकज कुमार दराद और अमित कुमार जैन: ये अधिकारी राज्य पुलिस के विभिन्न विंगों में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित कर चुके हैं।
  • सुधांशु कुमार, नैय्यर हसनैन खान और सुनील कुमार: कानून-व्यवस्था और विशेष जांच शाखाओं में इनका लंबा अनुभव रहा है।
  • डॉ. कमल किशोर सिंह और पारस नाथ: पुलिस आधुनिकीकरण और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में इनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसके साथ ही, बिहार कैडर के उन अधिकारियों के नामों पर भी विचार किया जा रहा है जो वर्तमान में केंद्र सरकार के विभिन्न सुरक्षा और खुफिया संगठनों में प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनमें सुशील एम. खोपड़े, एस. रवींद्रण, जगमोहन और अनिल किशोर यादव जैसे नाम शामिल हैं। इन अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापसी और राज्य में उनकी उपलब्धता भी चयन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

Bihar New DGP Selection: बिहार के नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया शुरू, इन वरिष्ठ IPS अफसरों के नाम रेस में सबसे आगे

चयन के प्रशासनिक मापदंड और आगामी विभागीय कदम

डीजीपी जैसे संवेदनशील और सर्वोच्च पुलिस पद के लिए केवल वरिष्ठता ही एकमात्र मापदंड नहीं होती है। चयन प्रक्रिया के दौरान संघ लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार कई अन्य महत्वपूर्ण मानकों को ध्यान में रखती है। इनमें सबसे प्रमुख अधिकारी की वर्तमान पदस्थापना, उनका प्रशासनिक अनुभव, संकट के समय त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और पुलिस बल का नेतृत्व करने का उनका पिछला रिकॉर्ड होता है। इसके अलावा, चयन समिति सूची में शामिल कुछ चुनिंदा अधिकारियों से उनकी व्यक्तिगत राय और राज्य में सेवा देने की उनकी इच्छा के बारे में भी अनौपचारिक चर्चा कर सकती है।

आगामी प्रक्रिया के तहत, केंद्रीय गृह मंत्रालय बिहार सरकार द्वारा भेजी गई सूची को औपचारिक रूप से यूपीएससी को सौंपेगा। इसके बाद नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि, यूपीएससी के सदस्य और बिहार के मुख्य सचिव व वर्तमान डीजीपी शामिल हो सकते हैं। इस बैठक में सभी पात्र अधिकारियों के डोजियर पर विचार करने के बाद तीन नामों का अंतिम पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा अंतिम नाम पर मुहर लगाई जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के आगामी महीनों में चरणबद्ध तरीके से पूरा होने की उम्मीद है, जिससे बिहार पुलिस के नए नेतृत्व की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

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