न्यूयॉर्क (खबर डोज़ ब्यूरो)। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करते हुए भारत और चीन का आभार जताया है। गुरुवार रात संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री शाह ने भोटेकोशी में आई भीषण बाढ़ के बाद नेपाल को मिली सहायता के लिए दोनों पड़ोसी देशों को धन्यवाद दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नेपाल, भारत और संयुक्त रूप से चीन को आगे आकर काम करना होगा, क्योंकि यह आपदा सिर्फ एक देश की नहीं बल्कि पूरे भूभाग की समस्या है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भोटेकोशी की बाढ़ को वैश्विक चेतावनी करार देते हुए कहा कि इस आपदा ने सड़कें, पुल, स्कूल, घर और स्थानीय लोगों के रोजगार को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि जलवायु आपदा से प्रभावित गरीब देशों को दोबारा खड़े होने के लिए कर्ज के बजाय ग्रांट यानी ऐसी आर्थिक मदद दी जाए जिसे वापस न लौटाना पड़े। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला संयुक्त राष्ट्र महासभा का संबोधन था, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से पर्यावरण और आपदा प्रबंधन पर जोर दिया।
भारत-चीन के साथ साझा अलर्ट सिस्टम का प्रस्ताव
आपदाओं से निपटने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री ने एक ठोस क्षेत्रीय कूटनीति का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने नेपाल, भारत और चीन के बीच एक साझा अलर्ट सिस्टम बनाने की बात कही ताकि बाढ़ और ग्लेशियर फटने जैसी घटनाओं का पहले ही अनुमान लगाया जा सके। इस व्यवस्था के तहत तीनों देश सैटेलाइट से मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों को आपस में साझा करेंगे, खतरनाक ग्लेशियर झीलों पर कड़ी नजर रखेंगे और आपात स्थिति में राहत तथा बचाव कार्यों में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
- सैटेलाइट डेटा और मौसम संबंधी जानकारियां साझा करना।
- खतरनाक ग्लेशियर झीलों की मॉनिटरिंग और मैपिंग।
- आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को मजबूत करना।
- राहत और बचाव अभियानों में तीनों देशों का आपसी सहयोग।

प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक बाढ़ आई थी, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही मची। इस प्राकृतिक आपदा में व्यापक स्तर पर जनहानि हुई और बुनियादी ढांचा चरमरा गया। नेपाल सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार इस आपदा से देश को करीब पांच अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जो देश की जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के लॉस एंड डेमेज फंड से बीस मिलियन डॉलर की सहायता की मांग की है, ताकि पुनर्निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा सकें।





