साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव
साइबर धोखाधड़ी और संदिग्ध बैंक लेनदेन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रिजर्व बैंक द्वारा जारी नए मसौदे के तहत बैंक ग्राहकों की वित्तीय प्रोफाइल के आधार पर उनके खातों में होने वाले लेनदेन की निगरानी करेंगे।

प्रस्तावित नियम और प्रशासनिक ढांचा
यह नई व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग रोकना है। इसके तहत बैंकों को संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई करने के अधिकार दिए जा रहे हैं।
खाता जांच के प्रमुख मानक
- बैंक किसी लेनदेन को केवल उसकी बड़ी रकम के आधार पर ही संदिग्ध नहीं मानेंगे, बल्कि ग्राहक की पुरानी वित्तीय प्रोफाइल का अध्ययन किया जाएगा।
- सामान्य तौर पर कम रकम के लेनदेन वाले खाते में अचानक बड़ा या असामान्य लेनदेन होने पर वह जांच के दायरे में आ सकता है।
- प्रस्ताव के अनुसार एक हजार रुपये या उससे अधिक के कुछ विशिष्ट लेनदेन भी इस निगरानी तंत्र के अंतर्गत आ सकते हैं।
- जरूरत पड़ने पर साइबर धोखाधड़ी से जुड़े पैसों को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए संबंधित राशि को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
ग्राहक अधिकार और पारदर्शिता
नियमों के तहत यदि किसी खाते या राशि पर अस्थायी रोक लगाई जाती है, तो बैंक को ग्राहक को तुरंत इसकी लिखित वजह बतानी होगी। इसके साथ ही बैंक का यह दायित्व होगा कि वह ग्राहक को रोक हटवाने की पूरी प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकारी से संपर्क करने का माध्यम समझाए। यह सूचना ग्राहक को उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ई-मेल के जरिए अधिकतम अगले कार्य दिवस की समाप्ति तक अनिवार्य रूप से भेजी जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहक अपना स्पष्टीकरण दे सकें।
अगली प्रशासनिक और अनुपालन प्रक्रिया
इस प्रस्तावित व्यवस्था को औपचारिक रूप से आगामी अप्रैल 2027 से लागू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए सभी वाणिज्यिक बैंकों को अपने आंतरिक तकनीकी और अनुपालन तंत्र को उन्नत करना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक इस मसौदे पर मिलने वाले फीडबैक और प्रशासनिक समीक्षा के बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी करेगा, जिसके आधार पर बैंक अपनी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करेंगे।







