पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत लगातार व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटे हैं। उनकी इसी सक्रियता और कार्यशैली से राज्य के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) भी प्रभावित हुए हैं। राजभवन में आयोजित 'टीबी मुक्त बिहार' विषयक उच्चस्तरीय विचार-विमर्श संगोष्ठी के दौरान राज्यपाल ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि के पिछले तीन-चार महीनों के कार्यों की खुलकर प्रशंसा की।
राज्यपाल ने टीबी उन्मूलन अभियान का सभी जिलों तक विस्तार और मोबाइल एक्स-रे मशीनों के जरिए स्क्रीनिंग की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अभियान में तकनीकी सुविधाओं के साथ-साथ जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी बेहद अहम है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के सभी 38 जिलों में जिला टीबी केंद्र संचालित हो रहे हैं और मरीजों की नि:शुल्क एक्स-रे जांच के लिए 499 केंद्र कार्यरत हैं।

अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और मानव संसाधन का विस्तार
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, नई सरकार के गठन के बाद जिला अस्पतालों में 105 नए आईसीयू बेड और 70 वेंटिलेटर जोड़े गए हैं, जिससे कुल आईसीयू बेड की संख्या 190 और वेंटिलेटर की संख्या 120 हो गई है। इसके अलावा अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस सेवा का विस्तार करते हुए 55 में से 25 अस्पतालों में यह सुविधा शुरू कर दी गई है। पटना के पीएमसीएच में सेंट्रलाइज्ड रेडियोलॉजी सिस्टम शुरू होने से मरीजों को एक ही परिसर में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं।
चिकित्सकीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर नियुक्तियां भी की गई हैं। राज्य में 200 विशेषज्ञ चिकित्सकों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 142 चिकित्सा शिक्षकों की बहाली हुई है। इसके अलावा ओटी असिस्टेंट, ईसीजी टेक्निशियन, ड्रेसर और एक्स-रे टेक्निशियन समेत कुल 2,219 तकनीकी कर्मियों की पदस्थापना की गई है ताकि मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

चिकित्सा शिक्षा और आर्थिक राहत की दिशा में कदम
चिकित्सा शिक्षा के मोर्चे पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से समस्तीपुर के श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज और छपरा राजकीय मेडिकल कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों के संचालन की अनुमति मिली है। साथ ही मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के तहत वार्षिक आय की सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे गरीब मरीजों को आर्थिक संबल मिलेगा।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में जिला अस्पतालों के इनडोर (आईपीईडी) में 49,450 मरीज भर्ती हुए, जबकि सर्जरी के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अनावश्यक रेफरल रोकने और स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को उच्च कोटि का इलाज मुहैया कराने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।





