पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में कथित तौर पर धांधली और वोट चोरी होने का गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखा हमला बोला है। आरजेडी नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्षता से काम नहीं कर रहा है और विपक्ष इस मुद्दे पर अब चुप नहीं बैठेगा। इसी कड़ी में आगामी आठ अक्टूबर को पटना में महागठबंधन की ओर से एक बड़े विरोध मार्च और लोकभवन मार्च की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें तमाम विपक्षी दल शामिल होंगे।
सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार से ही एसआईआर की शुरुआत हुई थी और चुनाव परिणामों में जो धांधली सामने आ रही है, उसे लेकर वे पहले से ही आवाज़ उठाते रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें विशेष मकसद के तहत इस पद पर बैठाया गया था।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार में महिलाओं के खातों में पैसे भेजे जा रहे थे, तब चुनाव आयोग खामोश क्यों बैठा रहा।
विपक्ष का आक्रोश और आगामी प्रदर्शन का शेड्यूल
चुनावी धांधली के विरोध में इंडिया गठबंधन और महागठबंधन ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है। इसके तहत सात अक्टूबर को राज्य के हर प्रखंड मुख्यालय पर ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाला जाएगा। इसके अगले दिन यानी आठ अक्टूबर को पटना में जोरदार प्रदर्शन होगा। विधानसभा के समक्ष सप्त मूर्ति के पास से यह लोकभवन मार्च शुरू होगा, जिसमें तमाम दिग्गज नेता और महागठबंधन के कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे। इसके अलावा दिल्ली में भी विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने और उसके बाद राष्ट्रपति से मुलाकात करने का कार्यक्रम तय किया गया है।
तेजस्वी यादव ने पुरानी चयन प्रक्रिया का हवाला देते हुए वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव आयुक्तों के कार्यकाल और फैसलों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र की जननी कहलाने वाले बिहार से ही इसे कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। विपक्ष की इस गोलबंदी से राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है और आने वाले दिनों में प्रशासन के समक्ष भी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।





