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जापान में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप? 7.1 तीव्रता के ताजा झटके से समझिए पूरी कहानी

By | Published: 30 Jul 2026, 10:33 AM
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जापान में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप? 7.1 तीव्रता के ताजा झटके से समझिए पूरी कहानी
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मुख्य बातें

  • जापान के दक्षिणी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस सवाल की ओर खींचा है कि आखिर जापान में इतने भूकंप क्यों आते हैं।
  • क्या ऐसे झटकों की भविष्यवाणी संभव है?
  • और जापान हर बार इतनी जल्दी सामान्य स्थिति में कैसे लौट आता है?
  • आइए आसान भाषा में समझते हैं।क्या हुआ है?जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीप क्यूशू के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया।

जापान के दक्षिणी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस सवाल की ओर खींचा है कि आखिर जापान में इतने भूकंप क्यों आते हैं। क्या हर बड़ा भूकंप सुनामी लाता है? क्या ऐसे झटकों की भविष्यवाणी संभव है? और जापान हर बार इतनी जल्दी सामान्य स्थिति में कैसे लौट आता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

क्या हुआ है?

जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीप क्यूशू के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। झटके इतने तेज थे कि कई इमारतों को नुकसान पहुंचा, सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई, हालांकि बाद में इसे वापस ले लिया गया। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं और प्रशासन लोगों से आफ्टरशॉक्स के प्रति सतर्क रहने की अपील कर रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों में एक शॉपिंग मॉल को भारी नुकसान और कई लोगों के फंसे होने की बात भी सामने आई है। 


जापान में इतने भूकंप क्यों आते हैं?

इसका सबसे बड़ा कारण जापान की भौगोलिक स्थिति है। जापान 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) नामक क्षेत्र में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्र है।

यहीं पर कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकराती और खिसकती रहती हैं। जब इन प्लेटों के बीच जमा ऊर्जा अचानक निकलती है, तो धरती कांपती है और भूकंप आता है। यही वजह है कि जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है।

क्या हर बड़ा भूकंप सुनामी लाता है?

नहीं।

हर शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी नहीं आती। सुनामी तभी पैदा होती है, जब समुद्र के भीतर आने वाला भूकंप समुद्र की सतह को बड़े पैमाने पर ऊपर-नीचे कर दे। यदि भूकंप जमीन के भीतर हो या समुद्र तल में पर्याप्त विस्थापन न हो, तो सुनामी की संभावना कम रहती है।

इस बार भी शुरुआती चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन बाद में खतरा कम होने पर उसे हटा लिया गया।


जापान हर बार इतनी जल्दी संभल कैसे जाता है?

यही जापान की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।

दशकों से भूकंप झेलने के कारण जापान ने अपनी पूरी व्यवस्था को आपदा प्रबंधन के हिसाब से विकसित किया है। वहां की अधिकांश आधुनिक इमारतें भूकंपरोधी मानकों के अनुसार बनाई जाती हैं। स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में नियमित रूप से मॉक ड्रिल कराई जाती है ताकि लोग आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें।

जापान की मौसम एजेंसी और आपदा प्रबंधन तंत्र भी बेहद तेज़ी से काम करता है। भूकंप के कुछ ही सेकंड के भीतर लोगों के मोबाइल फोन, टीवी और अन्य माध्यमों पर चेतावनी पहुंच जाती है। यही शुरुआती सेकंड कई बार हजारों लोगों की जान बचा देते हैं।


क्या भूकंप की भविष्यवाणी की जा सकती है?

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है, लेकिन इसका जवाब अभी भी 'नहीं' है।

वैज्ञानिक यह नहीं बता सकते कि किसी खास दिन, समय और स्थान पर भूकंप आएगा या नहीं। हालांकि आधुनिक तकनीक की मदद से भूकंप आने के कुछ सेकंड पहले शुरुआती चेतावनी जारी की जा सकती है। यह समय बहुत कम होता है, लेकिन ट्रेन रोकने, बिजली व्यवस्था नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका देने के लिए पर्याप्त साबित हो सकता है।

क्या भारत को भी चिंता करनी चाहिए?

जापान में आया यह भूकंप सीधे भारत के लिए खतरा नहीं है। दोनों देशों की भौगोलिक और टेक्टोनिक स्थितियां अलग हैं। हालांकि भारत भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व भारत, अंडमान-निकोबार और गुजरात जैसे इलाके भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।

यही कारण है कि विशेषज्ञ भारत में भी भूकंपरोधी निर्माण, आपदा प्रबंधन और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर लगातार जोर देते हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल जापान में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन लगातार आफ्टरशॉक्स की निगरानी कर रहा है और प्रभावित इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन मजबूत तैयारी, वैज्ञानिक योजना और जागरूक नागरिक इसके नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। शायद यही वजह है कि बार-बार भूकंप झेलने के बावजूद जापान हर बार खुद को संभालने में दुनिया के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आता है।

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