ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद देश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की लगातार बनी हुई गैरमौजूदगी ने देश के राजनीतिक गलियारों में अटकलों और तख्तापलट की आशंकाओं को हवा दे दी है। इस बीच, ईरान के भीतर कट्टरपंथियों और उदारवादी धड़े के बीच का टकराव खुलकर सामने आ गया है। कट्टरपंथी तत्वों ने देश के प्रमुख नेताओं, पेजेश्कियान और अराघची को सीधे तौर पर गंभीर धमकी दी है, जिससे देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक संतुलन को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान में आंतरिक सत्ता संघर्ष और कट्टरपंथियों की धमकी
ईरान के राजनीतिक परिदृश्य में मोजतबा खामेनेई के नए सर्वोच्च नेता बनने के बाद से ही खींचतान जारी है। उनकी अनुपस्थिति ने इस संघर्ष को और अधिक हवा दी है। इसी माहौल के बीच कट्टरपंथियों ने पेजेश्कियान और अराघची को निशाना बनाते हुए कहा है कि "हमारे हाथ में ब्लेड और आपका..."। इस धमकी ने ईरान के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे में मचे घमासान को उजागर कर दिया है। विश्लेषक इसे देश के भीतर एक संभावित तख्तापलट या बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जहां कट्टरपंथी गुट सत्ता पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहे हैं।

अमेरिका की एयरस्ट्राइक और जमीनी हमले की आशंका
इस आंतरिक राजनीतिक संकट के साथ-साथ ईरान को बाहरी मोर्चे पर भी भारी सैन्य दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। हाल ही में जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका का गुस्सा भड़क उठा है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर फिर से एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को निशाना बनाना और उसकी क्षमताओं को ध्वस्त करना है। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर एक सीक्रेट प्लान और नक्शा वायरल हो रहा है, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका ईरान पर ग्राउंड अटैक यानी जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है।

समझौता टूटने पर भड़के मोजतबा खामेनेई
अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में आई इस कड़वाहट के बीच दोनों देशों के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (MoU) भी टूट गया है। इस समझौते के टूटने पर ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि "ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई वैल्यू नहीं है"। इस बयान से साफ है कि ईरान अब अमेरिका के साथ किसी भी तरह के कूटनीतिक समझौते को लेकर बेहद अविश्वासी हो चुका है और दोनों देशों के बीच बातचीत के सारे रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं।
मिडिल ईस्ट में हवाई संकट और उड़ानों पर असर
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस सैन्य टकराव का असर अब पूरे मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) क्षेत्र पर दिखने लगा है। ईरान द्वारा किए गए हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के कारण पूरे क्षेत्र का एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) बंद कर दिया गया है। इस सुरक्षा संकट के चलते लगभग 179 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हवाई मार्ग बंद होने से दुबई से लेकर दोहा तक के हवाई अड्डों पर यात्री भारी मुश्किलों में फंस गए हैं। मिडिल ईस्ट से आ रही तस्वीरें बेहद खौफनाक हैं, जहां एक तरफ तबाही का मंजर है तो दूसरी तरफ बारूद का धुआं फैला हुआ है। यह स्थिति दर्शाती है कि ईरान का यह आंतरिक और बाहरी संघर्ष अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले चुका है।





