राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा बिहार विधान परिषद चुनाव की छह शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक असंतोष सतह पर आ गया है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से उम्मीदवारों के चयन पर सार्वजनिक आपत्ति जताते हुए ऐन चुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए नए चेहरों को तरजीह देने का गंभीर आरोप लगाया है।

विधान परिषद की 6 सीटों का गणित और घोषित उम्मीदवारों का संगठनात्मक ब्योरा
बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की खाली हो रही छह सीटों के लिए राष्ट्रीय जनता दल ने पहली बार एकमुश्त सूची जारी कर अपनी चुनावी रणनीति का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के अंतर्गत विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों पर सीधे योग्य स्नातकों और माध्यमिक व उच्च शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों द्वारा मतदान किया जाता है। राजद द्वारा जारी सूची में राज्य के प्रमुख भौगोलिक और प्रशासनिक क्षेत्रों को साधने का प्रयास किया गया है।
राजद के आधिकारिक प्रत्याशी चयन की सूची में निम्नलिखित प्रमुख नाम शामिल हैं:
- पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह, जो बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व जनता दल (यूनाइटेड) छोड़कर राजद में शामिल हुए थे।
- पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: दिलीप कुमार को चुनावी मैदान में उतारा गया है।
- कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: नितेश कुमार को राजद की ओर से प्रत्याशी बनाया गया है।
- दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: अनिल कुमार झा को टिकट देकर दांव खेला गया है।
- तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: डॉ. रश्मि विनायक गौतम को अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया गया है।
- सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: प्रो. जयराम यादव पर पार्टी ने भरोसा जताया है।
पटना सीट का विशेष महत्व और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
राजद के लिए राजधानी पटना से जुड़े दो निर्वाचन क्षेत्र—पटना शिक्षक और पटना स्नातक सीट—अत्यंत प्रतिष्ठापूर्ण माने जा रहे हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में लंबे समय से सत्ताधारी गठबंधन का दबदबा रहा है। इस सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नीरज कुमार की दावेदारी की मजबूत चर्चा है, जो इस क्षेत्र से लगातार तीन बार निर्वाचित होकर विधान परिषद पहुंचते रहे हैं। ऐसे में राजद प्रत्याशी दिलीप कुमार के लिए मतदाता आधार को अपने पक्ष में मोरना एक बड़ी सांगठनिक और प्रशासनिक चुनौती होगी। दूसरी ओर, परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह का पटना शिक्षक सीट पर उतरना क्षेत्रीय समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।
रोहिणी आचार्य का सार्वजनिक रुख और राजद के आंतरिक लोकतंत्र पर उठते सवाल
राजद द्वारा सूची जारी किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर पार्टी नेतृत्व के भीतर की दरारें उस समय सार्वजनिक हो गईं जब लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की। उन्होंने किसी प्रत्याशी का सीधा नाम लिए बिना पार्टी नेतृत्व के टिकट वितरण के मापदंडों पर गंभीर नैतिक व सांगठनिक सवाल खड़े कर दिए।
वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर ऐन चुनाव से पहले आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं, कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का घोर अनादर है। दशकों तक लाठियां खाकर पार्टी और संगठन को सींचने वाले नेताओं को दरकिनार करना राजद के आंतरिक लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
रोहिणी आचार्य के इस बयान ने पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उस दबी हुई भावना को उजागर कर दिया है, जो चुनावी मौसम में दूसरे राजनीतिक दलों से आए नेताओं को तत्काल उच्च पदों या टिकट दिए जाने से असहज महसूस करते हैं। अपने वक्तव्य में उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह निर्णय न केवल वर्षों से संघर्षरत लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी है, बल्कि पार्टी के मूल सिद्धांतों, वैचारिक जड़ों और संगठनात्मक मजबूती पर भी गहरा आघात पहुंचाता है।

स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की वैधानिक प्रक्रिया और जमीनी असर
बिहार में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से प्रक्रियात्मक रूप से भिन्न होता है। भारत निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, इन सीटों के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण विशेष अभियानों के माध्यम से किया जाता है।
- स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: इसमें केवल वही नागरिक मतदाता बनने के पात्र होते हैं जिन्होंने मतदान की तारीख से कम से कम तीन वर्ष पूर्व भारत के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की हो।
- शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: इसमें वे शिक्षक मतदान के अधिकारी होते हैं जो राज्य के भीतर निर्दिष्ट माध्यमिक, उच्च माध्यमिक या उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछले छह वर्षों में से कम से कम तीन वर्ष अध्यापन कार्य कर चुके हों।
- प्रशासनिक भूमिका: संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त (Divisional Commissioner) या जिलाधिकारी (District Magistrate) इन क्षेत्रों के लिए निर्वाची पदाधिकारी (Returning Officer) के रूप में कार्य करते हैं।
राजद के इस टिकट वितरण से शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाताओं के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है। जहां एक तरफ नए प्रत्याशियों को लाकर पार्टी अपनी पहुंच गैर-पारंपरिक मतदाता समूहों में फैलाने का प्रयास कर रही है, वहीं पार्टी के समर्पित कैडर में उपजे असंतोष से चुनावी प्रबंधन और पोलिंग बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में कठिनाई आ सकती है।
निर्वाचन आयोग का भावी कार्यक्रम और चुनावी अभियान का अगला चरण
प्रत्याशियों की सूची घोषित होने के बाद अब सभी की निगाहें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना और नामांकन प्रक्रिया की तिथियों पर टिक गई हैं। प्रशासनिक स्तर पर संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन और मतदान केंद्रों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटे हैं।
नामांकन पत्र दाखिल करने, पत्रों की जांच (Scrutiny) और नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद ही चुनाव मैदान की वास्तविक तस्वीर साफ होगी। राजद के समक्ष चुनौती केवल अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराने की ही नहीं, बल्कि चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले पार्टी के भीतर उभरे असंतोष और रोहिणी आचार्य की आपत्तियों से उपजे संगठनात्मक मतभेदों को सुलझाने की भी होगी। आगामी दिनों में पार्टी आलाकमान द्वारा असंतुष्ट धड़ों के साथ वार्ता और प्रशासनिक तैयारियों के बीच प्रादेशिक राजनीति का तापमान और बढ़ना तय है।





