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बिना विधायक या विधान पार्षद बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे? दीपक प्रकाश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब

By | Published: 30 Jul 2026, 04:16 PM
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बिना विधायक या विधान पार्षद बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे? दीपक प्रकाश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब
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मुख्य बातें

  • पटना / नई दिल्ली: बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
  • उच्चतम न्यायालय ने बिहार सरकार से सवाल किया है कि बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने कोई व्यक्ति छह महीने की तय संवैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद भी मंत्री पद प...
  • मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह कानून का एक शुद्ध प्रश्न है और राज्य सरकार को इस पर स्पष्ट और ठोस जवाब द...
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार के समक्ष स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्...

पटना / नई दिल्ली: बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उच्चतम न्यायालय ने बिहार सरकार से सवाल किया है कि बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने कोई व्यक्ति छह महीने की तय संवैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद भी मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह कानून का एक शुद्ध प्रश्न है और राज्य सरकार को इस पर स्पष्ट और ठोस जवाब दाखिल करना होगा।

संवैधानिक प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत की पीठ ने संवैधानिक स्थिति को रेखांकित किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार के समक्ष स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर किस आधार पर बना हुआ है। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, "यह कानून का शुद्ध प्रश्न है। राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। इसका स्पष्ट स्पष्टीकरण देना होगा।"

संविधान का अनुच्छेद 164(4) और पूरा विवाद

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) गैर-विधायक व्यक्तियों के मंत्री बनने और पद पर बने रहने की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट नियम निर्धारित करता है। इस प्रावधान के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:

  • सदस्यता की अनिवार्यता: यदि किसी व्यक्ति को राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य न होते हुए भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जाती है, तो उसके लिए शपथ ग्रहण की तारीख से छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है।
  • समय-सीमा की समाप्ति: यदि वह व्यक्ति छह महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता हासिल करने में विफल रहता है, तो संवैधानिक नियमों के तहत उसका मंत्री पद समाप्त हो जाता है।
  • दीपक प्रकाश का मामला: याचिका में आरोप लगाया गया है कि दीपक प्रकाश के मंत्री बने छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन वे अभी तक न तो बिहार विधानसभा के सदस्य बने हैं और न ही विधान परिषद के। इसके बावजूद वे मंत्री पद पर लगातार बने हुए हैं।


अदालत में याचिकाकर्ता और राज्य सरकार के तर्क

सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गईं:

  • याचिकाकर्ता की दलील: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि दीपक प्रकाश को मंत्री बने छह महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। इसके बावजूद उन्होंने राज्य विधायिका के किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त नहीं की है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) का सीधा उल्लंघन है।
  • राज्य सरकार का रुख: बिहार सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि यह मामला पहले से ही 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस पूरे विषय को न्यायालय के विवेक पर छोड़ती है।

दीपक प्रकाश की राजनीतिक पृष्ठभूमि

दीपक प्रकाश की नियुक्ति और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:

  • पारिवारिक और राजनीतिक संबंध: दीपक प्रकाश राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं।
  • मंत्रिमंडल में शामिल होना: सम्राट चौधरी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दीपक प्रकाश को बिहार सरकार में मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी।
  • चर्चा का विषय: जिस समय उन्हें बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसी समय से उनका मंत्री बनाया जाना राजनीतिक हलकों में चर्चा और बहस का विषय बना हुआ था।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद, 27 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जहां राज्य सरकार को इस संवैधानिक प्रश्न पर अपना रुख प्रस्तुत करना होगा।

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