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बिहार में शराबबंदी पर बोले सम्राट चौधरी, कहा- लोग अब ज्यादा पूजा-पाठ करने लगे हैं,कभी बनारस तो कभी कुशीनगर

By | Published: 02 Aug 2026, 01:05 PM
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बिहार में शराबबंदी पर बोले सम्राट चौधरी, कहा- लोग अब ज्यादा पूजा-पाठ करने लगे हैं,कभी बनारस तो कभी कुशीनगर
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मुख्य बातें

  • पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में शराबबंदी के प्रभावों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है।
  • उन्होंने कहा कि बिहार की तस्वीर अब बदल रही है और आज राज्य के लोग पहले की तुलना में ज्यादा पूजा-पाठ कर रहे हैं।
  • इसके साथ ही लोग देवघर, बनारस तथा कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा भी अधिक संख्या में कर रहे हैं।
  • मुख्यमंत्री का यह बयान शराबबंदी के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करने के साथ-साथ उन लोगों पर भी एक कटाक्ष माना जा रहा है, जो शराब पीने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते ...

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में शराबबंदी के प्रभावों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की तस्वीर अब बदल रही है और आज राज्य के लोग पहले की तुलना में ज्यादा पूजा-पाठ कर रहे हैं। इसके साथ ही लोग देवघर, बनारस तथा कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा भी अधिक संख्या में कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान शराबबंदी के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करने के साथ-साथ उन लोगों पर भी एक कटाक्ष माना जा रहा है, जो शराब पीने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं।

'नशामुक्त युवा' अभियान के उद्घाटन में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पटना के लोक भवन मंडपम में आयोजित 'नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत-संकल्प अभियान' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने नशा मुक्ति पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब हमारा समाज पूरी तरह से नशामुक्त बनेगा। उन्होंने इस अभियान के तहत देश के 10 करोड़ लोगों को नशे से मुक्त करने के संकल्प की सराहना भी की।


2016 में आर्थिक चुनौतियों के बावजूद लिया गया कठिन फैसला

मुख्यमंत्री ने शराबबंदी के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2016 में आर्थिक चुनौतियों के बावजूद राज्य में शराबबंदी लागू करने का साहसिक निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय राज्य की आर्थिक स्थिति आज जैसी मजबूत नहीं थी, फिर भी राजस्व की चिंता किए बिना सामाजिक हित को प्राथमिकता दी गई और यह कड़ा कदम उठाया गया।

पूरी तरह नशामुक्ति नहीं, लेकिन समाज में आया बड़ा बदलाव

अपने संबोधन के दौरान सम्राट चौधरी ने व्यावहारिक पहलुओं को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह दावा नहीं किया जा सकता कि बिहार में पूरी तरह से नशा समाप्त हो गया है, लेकिन समाज में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव जरूर आया है। सार्वजनिक स्थानों पर शराबबंदी का असर साफ तौर पर दिखाई देता है और विशेषकर महिलाओं के जीवन में इसका बेहद अनुकूल प्रभाव पड़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "चोरी-छिपे लोग शराब पीते हों, इसमें दो मत नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर पूर्ण रूप से शराबबंदी का असर दिखता है। महिलाओं की मांग पर ही शराबबंदी लागू की गई थी और इससे महिलाओं पर होने वाले अत्याचार में कमी आई है।"


दूसरे राज्यों की शराब से होने वाली कमाई का किया जिक्र

सम्राट चौधरी ने बताया कि शराबबंदी के कारण बिहार को एक बहुत बड़े राजस्व का त्याग करना पड़ा है। उन्होंने अन्य राज्यों के राजस्व के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को शराब से करीब 70 हजार करोड़ रुपये, दिल्ली को 40 हजार करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 50 हजार करोड़ रुपये और झारखंड को 25 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। इसके बावजूद बिहार ने राजस्व के नुकसान को सहते हुए सामाजिक कल्याण और पारिवारिक स्थिरता को सर्वोपरि रखा।

झारखंड पर निर्भरता से आगे निकलकर आत्मनिर्भर बना बिहार

राज्य की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब बिहार को अपने राजस्व का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा झारखंड से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 2024 में बजट पेश किया, तब बिहार का बजट झारखंड की तुलना में लगभग तीन गुना बड़ा था, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य आर्थिक रूप से तेजी से प्रगति कर रहा है।


ब्रह्माकुमारी संस्था से एमओयू करने का आग्रह

नशामुक्ति अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से एक विशेष अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि जिस तरह इस संस्था ने भारत सरकार के साथ नशामुक्ति को लेकर एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया है, उसी तरह वे बिहार सरकार के साथ भी एक समझौता करें ताकि इस नशामुक्ति अभियान को राज्य के घर-घर तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार कानून बना सकती है, लेकिन उसे पूरी तरह सफल बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों पर रखी बात

नशामुक्ति के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव कर रही है। बिहार में अब तक 211 डिग्री कॉलेज खोले जा चुके हैं ताकि छात्रों, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपने घरों से दूर बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार आने वाले समय में 400 और डिग्री कॉलेज खोलने की दिशा में सक्रियता से काम कर रही है। इसके साथ ही, बीएड कॉलेजों में भी आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित कर वहां डिग्री कॉलेज संचालित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि उच्च शिक्षा की पहुंच को और सुगम बनाया जा सके।

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