बांकीपुर उपचुनाव संपन्न: 25 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद
बिहार के पटना जिला स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर उप-चुनाव के तहत मतदान की प्रक्रिया हंगामे और घमासान के बीच संपन्न हो चुकी है। इस चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे कुल 25 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बंद हो गया है। चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतों की गिनती 3 अगस्त को कराई जाएगी, जिसके बाद ही यह साफ हो सकेगा कि बांकीपुर की जनता किस उम्मीदवार को अपना नया विधायक चुनती है।
मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के तुरंत बाद विभिन्न एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए एग्जिट पोल के नतीजे भी जारी कर दिए गए हैं। अधिकतर सर्वे के अनुमानों में बांकीपुर विधानसभा सीट से जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत की संभावना जताई गई है।

रोहिणी आचार्य का बीजेपी पर कड़ा प्रहार: सोशल मीडिया पर लगाए गंभीर आरोप
बांकीपुर उपचुनाव के दौरान सामने आई मारपीट और हंगामे की घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए रोहिणी आचार्य ने बीजेपी की चुनावी कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।
रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के उद्देश्य से हर प्रकार का गलत हथकंडा अपनाने का काम करती है। उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव में हुई अनिमितताओं और बाधाओं का जिक्र करते हुए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे:
- विरोधी दल के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट: मतदान के दौरान विपक्षी दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा और मारपीट की गई।
- पोलिंग एजेंटों और समर्थकों को रोकना: निष्पक्ष मतदान कराने की कोशिश कर रहे विरोधी दल के समर्थकों, कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंटों को असामाजिक तत्वों तथा गुंडों के बल पर रोकने का प्रयास किया गया।
- सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग: सुरक्षा बलों और पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था की आड़ में उन संभावित मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया जो विरोध में वोट डाल सकते थे।
- बूथ कैप्चरिंग और धीमी वोटिंग: बूथ पर कब्जा करने की कोशिशों के साथ-साथ चुनाव आयोग की मदद लेकर ईवीएम में खराबी का बहाना बनाया गया, जिससे मतदान की गति को जानबूझकर धीमा या बंद कराया गया।

2024 के सारण लोकसभा चुनाव के अनुभवों का किया जिक्र
अपने वक्तव्य में रोहिणी आचार्य ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए बताया कि जब वह खुद सारण संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी थीं, तब उन्होंने बीजेपी द्वारा इन गैर-कानूनी तौर-तरीकों का प्रत्यक्ष इस्तेमाल होते देखा था। उन्होंने बताया कि मतदान के दौरान छपरा शहर के एक बूथ पर जब उन्होंने जारी धांधली पर आपत्ति दर्ज कराई, तो उन पर हमला करने और हत्या करने की कोशिश की गई।
रोहिणी आचार्य के अनुसार, उस दौरान उनके ऊपर पत्थर और रोड़े फेंके गए तथा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। घटनाक्रम यहीं नहीं रुका, बल्कि मतदान समाप्त होने के ठीक अगले दिन उनके एक युवा समर्थक और कार्यकर्ता चंदन यादव की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हत्या बीजेपी द्वारा भेजे गए असामाजिक तत्वों द्वारा की गई थी।
हत्यारों की गिरफ्तारी न होने और धमकियों पर उठाए सवाल
सारण की घटना का उल्लेख करते हुए रोहिणी आचार्य ने कहा कि इस संगीन वारदात के बाद सारण के तत्कालीन व वर्तमान सांसद ने ऑन-कैमरा आकर हत्या और गोलीबारी जैसी घटना को जायज ठहराने का काम किया था। उन्होंने अफसोस जताते हुए लिखा कि आज तक उस निर्मम हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इसके विपरीत, मृतक चंदन यादव के परिजनों और उनके समर्थकों को यह कहकर लगातार डराया-धमकाया जा रहा है कि "गोलियां चलती रही हैं और आगे भी चलती रहेंगी।"
"लोकतंत्र में जनमत सर्वोपरि, लेकिन बीजेपी को सरोकार नहीं"
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के समापन में रोहिणी आचार्य ने लिखा कि लोकतंत्र के भीतर जनमत को सर्वोपरि माना जाता है, लेकिन बीजेपी का इससे कभी कोई सरोकार नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले बंगाल में और अब बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी ने अपने इन्हीं तौर-तरीकों का प्रदर्शन एक बार फिर से कर दिखाया है।





