बिहार के बक्सर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ने प्रधान डाकघर में अचानक छापेमारी की है। इस कार्रवाई से डाकघर के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। सीबीआई की टीम ने बक्सर स्थित डाक डिवीजन और सब-डिवीजन कार्यालय में दबिश दी और वहां मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खंगाला। इस पूरी कार्रवाई के दौरान टीम ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे नगर थाने में ले जाकर पूछताछ की जा रही है।
बंद कमरे में तीन लोगों से पूछताछ
मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम ने बक्सर के प्रधान डाकघर में औचक छापेमारी करते हुए वहां के प्रशासनिक और वित्तीय रिकॉर्ड्स की गहन जांच की। जांच के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद, टीम ने तीन संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए इन तीनों व्यक्तियों को तुरंत नगर थाना ले जाया गया, जहां एक बंद कमरे में उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद से ही डाक विभाग के स्थानीय अधिकारियों में भारी घबराहट देखी जा रही है।

डाक अधीक्षक का मोबाइल बंद, कार्यालय से बाहर निकलने की खबर
इस बड़ी छापेमारी के बाद बक्सर की डाक अधीक्षक सरिता कुमारी के संबंध में भी कई जानकारियां सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि सीबीआई की रेड के बाद डाक अधीक्षक सरिता कुमारी अपने कार्यालय से बाहर निकल गईं। इसके साथ ही उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है, जिससे उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक डाक विभाग या जांच एजेंसी की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
नया डाक प्रमंडल बनने के बाद बढ़ा था प्रशासनिक दायरा
गौरतलब है कि बक्सर डाकघर को कुछ महीने पहले ही नए डाक प्रमंडल (डाक डिवीजन) का दर्जा दिया गया था। नया डाक प्रमंडल बनने के बाद से यहां प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन का दायरा भी काफी बढ़ गया था। इस नए दर्जे के बाद से ही विभाग में कई तरह के बदलाव हुए थे। सीबीआई की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद अब विभागीय कामकाज और वित्तीय गतिविधियों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह कार्रवाई इसी नए कार्यकाल के दौरान हुए किसी मामले को लेकर है या फिर किसी पुराने प्रकरण से जुड़ी हुई है।

वित्तीय अनियमितता और रिश्वतखोरी की आशंका
स्थानीय स्तर पर इस छापेमारी को लेकर कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह पूरी कार्रवाई किसी कथित वित्तीय अनियमितता या रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, जांच एजेंसी या स्थानीय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सीबीआई की टीम द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के बाद ही इस मामले की वास्तविक सच्चाई सामने आ सकेगी। फिलहाल, सभी को जांच एजेंसी के आधिकारिक बयान का इंतजार है, जिसके बाद ही स्पष्ट होगा कि यह कार्रवाई किस विशिष्ट आरोप के तहत की गई है।





