मुजफ्फरपुर (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में आगामी दुर्गा पूजा उत्सव को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत राज्य में दुर्गा प्रतिमाओं की अधिकतम ऊंचाई 20 फीट और पूजा पंडालों की ऊंचाई 40 फीट तक सीमित कर दी गई है। पर्यावरण संरक्षण और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने यह कड़ा रुख अपनाया है।
बिहार राज्य प्रदूषण पर्षद के सदस्य सचिव ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर नियमों का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद स्थानीय पूजा समितियों को अपने पंडाल और मूर्ति के आकार में बदलाव करना होगा। विशेष रूप से बड़े बजट के पंडालों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों पर पूरी तरह प्रतिबंध
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के आधार पर जारी इन निर्देशों में मूर्तियों के निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा, मूर्तियों को रंगने के लिए पारा, कैडमियम, आर्सेनिक, शीशा और क्रोमियम जैसी जहरीली धातुओं वाले कृत्रिम रंगों के उपयोग पर रोक रहेगी।
मूर्तिकारों को केवल पानी में घुलनशील और पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, पूजा पंडालों और मूर्तियों की सजावट में सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल जैसी गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्रियों के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह पाबंदी रहेगी। स्थानीय प्रशासन को इन नियमों की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नदियों में नहीं बल्कि कृत्रिम तालाबों में होगा विसर्जन
प्रदूषण पर्षद ने स्पष्ट किया है कि गंगा और अन्य सहायक नदियों के जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए मूर्तियों का विसर्जन केवल कृत्रिम तालाबों में ही किया जाएगा। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने नदियों में विसर्जन की अनुमति देने की मांग की थी, लेकिन पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बोर्ड ने इस मांग को खारिज कर दिया है।
सभी जिला प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में कृत्रिम तालाबों का निर्माण कराएं। विसर्जन के बाद इन तालाबों से मूर्तियों के अवशेषों और पूजा सामग्री को तुरंत हटाकर उनका सुरक्षित निपटान किया जाएगा, ताकि भूजल या स्थानीय पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। नियम तोड़ने वाली पूजा समितियों और मूर्तिकारों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

इस फैसले से स्थानीय मूर्तिकारों और पूजा समितियों की तैयारियों पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है। मुजफ्फरपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में कई बड़े पंडालों का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका था। अब जिला प्रशासन इन समितियों के साथ बैठक कर नए नियमों के तहत पंडालों और मूर्तियों के आकार को सीमित करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।





