पटना: बिहार में स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 31 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन के सभागार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दी।
2011 की जनसंख्या के आधार पर होगा पंचायतों का परिसीमन
कैबिनेट बैठक में लिए गए सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बिहार में ग्राम पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन कराना है। राज्य में अब वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायतों का परिसीमन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
इस परिसीमन के माध्यम से जनसंख्या के अनुरूप संतुलित प्रतिनिधित्व और आम जनता को जनसुविधाओं की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। ग्राम पंचायत क्षेत्रों के नए सिरे से गठन और परिसीमन से प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा, स्थानीय प्रतिनिधित्व मजबूत होगा और ग्राम पंचायत क्षेत्रों के विकास में क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।
ग्राम पंचायतों को मिला टैक्स और शुल्क वसूलने का अधिकार
बिहार के इतिहास में पहली बार ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर (टैक्स) और शुल्क वसूलने का अधिकार सौंपा गया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में 'ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली, 2026' के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इस नियमावली के तहत अब ग्राम पंचायतों को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होंगे:
- ग्राम पंचायतें अब होल्डिंग से दखलकार पर कर वसूल सकेंगी।
- पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पेशा, व्यापार और उद्योग पर शुल्क लगाने का अधिकार होगा।
- पंचायत स्तर से प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं पर शुल्क लिया जा सकेगा।
- पंचायत की तरफ से लगाए जाने वाले अन्य प्रकार के शुल्क भी निर्धारित किए जा सकेंगे।
अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि पंचायतें इस नियमावली में तय की गई अधिकतम दर की सीमा के भीतर रहते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर या शुल्क लगा सकेंगी। इससे पंचायतों की अपनी आय (स्वयं के स्रोत) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। बिहार में अब तक ऐसी कोई नियमावली अस्तित्व में नहीं थी और न ही किसी राज्यादेश के जरिए पंचायतों को यह अधिकार दिया गया था। इस नई नियमावली में इन सभी पहलुओं का विशेष ध्यान रखते हुए उचित प्रावधान किए गए हैं।
खनन नियमावली में संशोधन और क्रशर मशीन की दूरी में बदलाव
कैबिनेट ने राजस्व बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से बिहार खनिज (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) (द्वितीय संशोधन) नियमावली- 2026 को भी स्वीकृति दी है। इस संशोधन के तहत अब पहाड़ों के छोटे-छोटे ब्लॉक बनाकर उनका खनन पट्टा जारी किया जाएगा। इससे ई-नीलामी की प्रक्रिया में अधिक से अधिक बोलीदाता भाग ले सकेंगे, जिससे राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।
इसके अलावा, पर्यावरण और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए क्रशर मशीनों की स्थापना के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले किसी भी खनन क्षेत्र की 500 मीटर की परिधि में क्रशर मशीन स्थापित करने का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 2 किलोमीटर कर दिया गया है।
भूतपूर्व सैनिक सह कक्षपालों के मानदेय में वृद्धि और कैदियों के लिए मुआवजा नीति
राज्य सरकार ने गृह विभाग के अंतर्गत भी दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं:
- मानदेय में बढ़ोतरी: राज्य की विभिन्न जेलों (काराओं) में तैनात भूतपूर्व सैनिक सह कक्षपालों के मासिक मानदेय में भारी बढ़ोतरी की गई है। अब उनका मानदेय 19 हजार 800 रुपये से बढ़ाकर सीधे 30 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
- कैदियों की मौत पर मुआवजा नीति: राज्य की जेलों में बंद कैदियों की प्राकृतिक मृत्यु, प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली आकस्मिक मृत्यु या किसी भी अप्राकृतिक कारण से होने वाली मौत के मामलों के लिए एक विशेष नीति बनाई जाएगी। इसके तहत मृतक बंदी के आश्रितों, निकटतम परिजनों या उत्तराधिकारियों को मुआवजा भुगतान किया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब गृह विभाग (कारा) इस नीति का प्रारूप तैयार करेगा।





