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बिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी राहत, अब सीधे बैंक खाते में आएगी दूध बेचने की रकम

| Published: | Updated:
बिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी राहत, अब सीधे बैंक खाते में आएगी दूध बेचने की रकम
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मुख्य बातें

  • बिहार के दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े पशुपालकों के लिए बड़ी राहत भरी पहल शुरू की गई है।
  • अब दुग्ध उत्पादकों को अपना दूध बेचने के बाद भुगतान प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • कॉम्फेड की तरफ से एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके अंतर्गत दूध की कीमत सीधे तौर पर उत्पादकों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
  • इस नई व्यवस्था के लागू होने से दूध बिक्री के बाद मिलने वाले पैसों की पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और सुगम हो जाएगी।

बिहार के दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े पशुपालकों के लिए बड़ी राहत भरी पहल शुरू की गई है। अब दुग्ध उत्पादकों को अपना दूध बेचने के बाद भुगतान प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी। कॉम्फेड की तरफ से एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके अंतर्गत दूध की कीमत सीधे तौर पर उत्पादकों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।

सीधे बैंक खातों में पहुंचेगी भुगतान की राशि

इस नई व्यवस्था के लागू होने से दूध बिक्री के बाद मिलने वाले पैसों की पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और सुगम हो जाएगी। अब तक प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के माध्यम से राशि भेजी जाती थी, जिसे बदलकर सीधे उत्पादकों के बैंक खातों में भेजने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए प्राथमिक स्तर के संघ, दूध विक्रेताओं और उत्पादकों की पूरी सूची उनके बैंक खाते के विवरण के साथ संबंधित दुग्ध संघों को मुहैया कराएंगे।

बिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी राहत, अब सीधे बैंक खाते में आएगी दूध बेचने की रकम

दो चरणों में लागू होगी व्यवस्था

इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। सबसे पहले इसी माह के अंत तक राज्यभर के विभिन्न जिलों से जुड़े लगभग 5 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के करीब 50 हजार दूध उत्पादकों के खातों में सीधे भुगतान की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। इसके उपरांत, इसे विस्तार देते हुए राज्य के कुल 22 हजार 416 दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 7 लाख से ज्यादा दूध उत्पादकों को इस दायरे में लाया जाएगा।

बिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी राहत, अब सीधे बैंक खाते में आएगी दूध बेचने की रकम

आठ दुग्ध संघों से जुड़े हैं लाखों उत्पादक

वर्तमान समय में कॉम्फेड के साथ बिहार के कुल आठ प्रमुख दुग्ध संघ जुड़े हुए हैं। इनमें पटना का वैशाली पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, बरौनी का राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, मुजफ्फरपुर का तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, समस्तीपुर का मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, आरा का शाहाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, भागलपुर का विक्रमशिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, गया का मगध दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ और सुपौल का कोशी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ शामिल हैं। इन सभी संघों से 7 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक जुड़े हैं जो प्रतिदिन बड़े पैमाने पर दूध संग्रह करवाते हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी

कॉम्फेड के एमडी कपिल अशोक ने जानकारी दी है कि दुग्ध उत्पादकों के खातों में सीधे राशि भेजने के लिए डीएटी यानी डायरेक्ट अकाउंट ट्रांसफर व्यवस्था को अमल में लाया जा रहा है। इस कदम से पशुपालकों को किसी भी स्तर पर अनावश्यकीय प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

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सुधा ब्रांड के लिए होता है संग्रह

कॉम्फेड से जुड़े इन उत्पादकों द्वारा प्रतिदिन जो दूध एकत्र किया जाता है, उसका उपयोग प्रसिद्ध सुधा ब्रांड के तहत किया जाता है। इसके जरिए पैकेटबंद दूध के अलावा पनीर, दही, आइसक्रीम और मिल्क पाउडर जैसे कई अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल संग्रहित दूध का लगभग 70 फीसदी हिस्सा पाउच दूध के रूप में बेचा जाता है, जबकि शेष दूध से अन्य सामग्रियां बनाई जाती हैं। सीधे बैंक खाते में भुगतान की इस प्रणाली से किसानों और पशुपालकों को काफी सुविधा मिलेगी।

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