पटना के बापू सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्रता नियमों में बड़े बदलाव की घोषणा की गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब केवल मोटरसाइकिल होने या सीमित कृषि भूमि के आधार पर किसी भी जरूरतमंद गरीब परिवार को पक्के मकान के लाभ से बाहर नहीं रखा जाएगा। नए नियमों के तहत मोटरसाइकिल रखने वाले और पांच एकड़ तक असिंचित अथवा ढाई एकड़ तक सिंचित जमीन वाले परिवार भी योजना के दायरे में आएंगे। इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों के उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो अब तक संपत्ति मानदंडों के कारण असमंजस में थे।
नियमों में ढील से ग्रामीण परिवारों को राहत
केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के नियमों को व्यावहारिक बनाए जाने के बाद उन परिवारों के लिए पक्का मकान पाने का रास्ता साफ हो गया है जो अब तक कच्चे या जर्जर मकानों में रहने को विवश थे। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सीमित संसाधनों के आधार पर किसी गरीब को बेघर नहीं रखा जा सकता। अब जिन परिवारों के पास खेती के लिए limited जमीन है या आवागमन के लिए मोटरसाइकिल है, वे भी इस कल्याणकारी योजना के पात्र माने जाएंगे।
बिहार को 11.18 लाख से अधिक नए मकानों का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत कुल 11 लाख 18 हजार 937 मकान बनाने का लक्ष्य पत्र सौंपा। यह पत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को प्रदान किया गया। इस विशाल निर्माण कार्य के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्य को 13,427 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
पंचायतों और ग्रामीण विकास के लिए बजटीय आवंटन
राज्य के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तीय मदद की भी विस्तृत घोषणा की गई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत बिहार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में मार्च तक 9,402 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद लगभग 10,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मिलने की भी बात कही गई। इस कुल निवेश से राज्य की प्रत्येक पंचायत को औसतन करीब 5.84 करोड़ रुपये तक की विकास राशि मिल सकेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

2.35 लाख लाभुकों को मिली नए मकानों की चाबी
कार्यक्रम में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान पूरे किए गए 2 लाख 35 हजार आवासों में से कुछ लाभुकों को सांकेतिक रूप से उनके पक्के घर की चाबी सौंपी गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि गरीब परिवार की सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास का आधार है। उन्होंने कहा कि राज्य में जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर तेज गति से चल रहा है।
बिहार में आवास निर्माण की रफ्तार के आंकड़े
समारोह के दौरान राज्य में बीते वर्षों के दौरान हुई आवास निर्माण की प्रगति के तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत किए गए:
- 1986 से 2014 तक: इंदिरा आवास योजना के तहत बिहार में करीब 30 लाख पक्के मकान बनाए गए थे, जिनमें कई अधूरा रह गए थे। उस दौरान हर साल औसतन करीब 1.07 लाख घर ही बनते थे।
- 2014 से 2026 तक: राज्य में पक्के मकानों का आवंटन बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गया है। अब निर्माण की औसत रफ्तार बढ़कर लगभग 4.17 लाख मकान प्रति वर्ष हो गई है।
2018 के सर्वे का संदर्भ और अन्य घोषणाएं
बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2018 में कराए गए सर्वे में लगभग 19 लाख परिवार पक्के मकान से वंचित पाए गए थे। ऐसे में पात्रता का दायरा बढ़ने से इन सभी वंचितों को पक्का घर मिलने की उम्मीद जागी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की बात भी कही, जिससे बाढ़, सूखा या आग जैसी आपदाओं में फसलों के नुकसान की भरपाई किसानों को मिल सके। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार सहित कई मंत्री व अधिकारी मौजूद रहे।





