बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत शिक्षा विभाग ने बारिश के मौसम को देखते हुए नया निर्देश जारी किया है। इस आदेश के दायरे में राज्य के करीब 67 हजार सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 1 करोड़ 65 लाख बच्चे आएंगे।
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करोड़ों बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब बारिश के मौसम में स्कूली बच्चों को परोसे जाने वाले दोपहर के भोजन यानी मिड-डे मील में कुछ खास सब्जियों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। मिड-डे मील योजना के निदेशक विनायक मिश्र ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। सभी स्कूलों को इस आदेश का सख्ती से और तुरंत पालन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों की सेहत से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।
स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचा
शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे पुख्ता प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण जुड़े हैं। मानसून के दौरान हवा में नमी की मात्रा अधिक होती है, जिससे खाद्य पदार्थों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सब्जियों पर रोक के वैज्ञानिक व प्रशासनिक कारण
विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मानसून के मौसम में कुछ खास सब्जियों की संरचना ऐसी होती है कि उनमें नमी जल्दी समा जाती है।
- बैंगन, भिंडी और पत्ता गोभी: इन सब्जियों में नमी अधिक रहने के कारण इनमें कीड़े, बैक्टीरिया और फफूंद बहुत जल्दी पनपते हैं।
- पत्तेदार साग: किसी भी प्रकार का हरा पत्तेदार साग मानसून के दिनों में मिट्टी और पानी के संपर्क में आने से सबसे जल्दी संक्रमित होता है।
- फूड पॉइजनिंग का जोखिम: यदि ऐसी सब्जियों को उच्च तापमान पर भी ठीक से साफ न किया जाए या वे थोड़ी भी खराब हालत में हों, तो बच्चों में गंभीर फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी बीमारियां फैल सकती हैं।
इसी प्रशासनिक दूरदर्शिता के तहत विभाग ने एहतियात बरतते हुए इन सब्जियों को मानसून सीजन के दौरान मिड-डे मील की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया है।

ज़मीनी असर
और बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
इस नए आदेश का सीधा असर राज्य की सबसे बड़ी स्कूल पोषण योजना पर पड़ा है, जिसे पहले मिड-डे मील और अब पीएम पोषण योजना के रूप में जाना जाता है।
- ताजी मौसमी सब्जियां: विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे प्रतिबंधित सब्जियों के विकल्प के रूप में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजी, साफ और सुरक्षित मौसमी सब्जियों का उपयोग करें।
- सफाई और खाद्य सुरक्षा: भोजन तैयार करते समय रसोईघर में पूर्ण स्वच्छता बनाए रखने, ताजी सामग्री का प्रयोग करने और खाद्य सुरक्षा के सभी स्थापित नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
- पोषण और सुरक्षा का संतुलन: उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को मिलने वाले पोषक तत्वों में कमी न आए, लेकिन बीमारी फैलाने वाले जोखिमों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
यह योजना राज्य के लगभग 1 करोड़ 65 लाख विद्यार्थियों को कवर करती है, इसलिए ज़मीनी स्तर पर इसकी एक-एक प्लेट की निगरानी करना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।

गुणवत्ता की निगरानी और आगामी विभागीय कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने केवल नई सब्जियों की सूची जारी करने पर ही विराम नहीं लगाया है, बल्कि जिलों को सख्त प्रशासनिक निगरानी रखने को कहा है। स्कूलों में रोजाना बनने वाले भोजन की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर बच्चे को सुरक्षित भोजन मिल रहा है। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी स्कूल या एजेंसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है या खाने की गुणवत्ता में कोई कमी मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग की यह स्पष्ट चेतावनी सभी जिलों के माध्यम से प्रखंड और स्कूल स्तर तक पहुंचाई जा चुकी है, और अगले कुछ दिनों में जिला स्तरीय कमेटियां औचक निरीक्षण के जरिए इस व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करेंगी।





