बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाला यह महत्वपूर्ण सत्र 24 जुलाई को समाप्त होगा। इस बार के सत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव सदन में उपस्थित नहीं रहेंगे। वे वर्तमान में देश से बाहर हैं। सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें विभिन्न दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने पर चर्चा की।

तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर राजद का रुख
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के देश से बाहर होने के कारण राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत इस सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए। तेजस्वी यादव के सदन में न रहने को लेकर पूछे गए सवालों पर कुमार सर्वजीत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि इस बात का क्या सबूत है कि तेजस्वी यादव यूरोप गए हैं? उन्होंने विपक्ष की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, "अगर नेता प्रतिपक्ष नहीं हैं तो क्या हुआ, उनके सिपाही यहां मौजूद हैं। वे सदन में जनता की आवाज उठाएंगे।"
कुमार सर्वजीत ने सरकार और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में हत्या, किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे मुंह बाए खड़े हैं। इन महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल पूछने और चर्चा करने के बजाय केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि विपक्ष के नेता सदन में मौजूद हैं या नहीं।

सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। बैठक में उप मुख्यमंत्री विजेंद्र यादव और विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा, सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया, सचेतक राजू तिवारी, विधायक आलोक मेहता, अजय कुमार, अरुण सिंह, माधव आनंद, आईपी गुप्ता, अख्तरुल ईमान, सतीश यादव और अभिषेक रंजन भी बैठक में मौजूद रहे। सभी नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष को सदन के सकारात्मक संचालन में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है।
5 दिवसीय सत्र का पूरा कार्यक्रम और कार्यसूची
इस मानसून सत्र के दौरान कुल 5 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र की विस्तृत कार्यसूची इस प्रकार तय की गई है:
- 20 जुलाई (पहला दिन): सत्र के पहले दिन राज्यपाल द्वारा मंजूर किए गए अध्यादेशों को पटल पर रखा जाएगा। इसके साथ ही, वित्त मंत्री विजेंद्र यादव चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहली अनुपूरक व्यय विवरणी सदन के सामने पेश करेंगे।
- 21 और 22 जुलाई (दूसरा और तीसरा दिन): इन दो दिनों के दौरान राजकीय विधेयक पेश किए जाएंगे और अन्य महत्वपूर्ण राजकीय कार्यों को निष्पादित किया जाएगा।
- 23 जुलाई (चौथा दिन): इस दिन अनुपूरक व्यय विवरणी पर वाद-विवाद होगा और इसके बाद विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा।
- 24 जुलाई (पांचवां और आखिरी दिन): सत्र के अंतिम दिन गैर-सरकारी संकल्प लाए जाएंगे, जिन पर चर्चा की जाएगी।
डिजिटल व्यवस्था: ऑनलाइन होंगे शून्यकाल और ध्यानाकर्षण
सदन की कार्यवाही को आधुनिक और समय-अनुकूल बनाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने नई ऑनलाइन व्यवस्थाओं की घोषणा की है। उन्होंने दलीय नेताओं से अपील की है कि वे अपने सदस्यों को सदन के भीतर रचनात्मक और अनुशासित रखें ताकि प्रश्नोत्तर काल बाधित न हो। समय की बचत के लिए निम्नलिखित ऑनलाइन समय-सारणी तय की गई है:
- शून्यकाल (Zero Hour): शून्यकाल के दौरान उठाए जाने वाले सवाल सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे।
- ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion): ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए सुबह 9:00 बजे से 10:00 बजे तक का समय ऑनलाइन निर्धारित किया गया है।
इस ऑनलाइन व्यवस्था का मुख्य फायदा यह होगा कि कागजी कार्रवाई में लगने वाले समय की बचत होगी और सदन की कार्यवाही अधिक सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकेगी।
अधिकारियों की जवाबदेही और नई कार्य संस्कृति
सदन में पूछे जाने वाले प्रश्नों के समय पर और सटीक उत्तर सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। डॉ. प्रेम कुमार ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि सदन में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर समय सीमा के भीतर प्राप्त होने चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव की सदन में उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
इसके साथ ही, अध्यक्ष ने अधिकारियों को एक नई कार्य संस्कृति विकसित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त होने के कारण फोन नहीं उठा पाता है, तो बैठक समाप्त होने के बाद उसे वापस फोन (कॉल बैक) करने की आदत डालनी होगी। इस कदम से विधायकों के सवालों के जवाब समय पर मिल सकेंगे और प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी।

सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और मीडिया कवरेज
सत्र के दौरान सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। परिसर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, सुगम ट्रैफिक व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं, साफ-सफाई और पार्किंग की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रेस सलाहकार समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें पत्रकारों के साथ सदन की कार्यवाही के व्यापक और निष्पक्ष प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इन सभी पुख्ता प्रबंधों का उद्देश्य मानसून सत्र को बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक संपन्न कराना है।






