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बिहार में स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियों पर नया नियम,नहीं मानी तो होगी कार्रवाई

By | Published: 08 Jul 2026, 08:26 AM
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बिहार में स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियों पर नया नियम,नहीं मानी तो होगी कार्रवाई
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मुख्य बातें

  • बिहार स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों, एएनएम, आशा और दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियों को लेकर नए और सख्त निर्देश जारी किए हैं।
  • अब हर छुट्टी का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
  • अगर नियमों का पालन नहीं हुआ तो कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
  • बिहार स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

बिहार स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों, एएनएम, आशा और दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियों को लेकर नए और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब हर छुट्टी का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। अगर नियमों का पालन नहीं हुआ तो कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। बिहार स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य समितियों और प्रखंड अस्पतालों को निर्देश दिया है कि अब हर स्वास्थ्य कर्मी की छुट्टी का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए एक तय प्रारूप भी जारी किया गया है, जिसमें हर महीने की अवकाश सूची तैयार करनी होगी। नए आदेश के मुताबिक, अब एसएल, सीएल, एनएल और एल जैसी सभी तरह की छुट्टियों का पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप में छुट्टी की जानकारी देना या आपसी सहमति से छुट्टी लेना काफी नहीं होगा। अस्पताल प्रबंधन को हर छुट्टी का रिकॉर्ड अपडेट रखना होगा।


स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई बार कर्मचारी बिनासही व्यवस्था किए छुट्टी पर चले जाते हैं। इसका सीधा असर अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। मरीजों को परेशानी होती है और जरूरी सेवाएं समय पर नहीं मिल पातीं। विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा असर नियमित टीकाकरण अभियान, गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों के टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला है। कई जगह एएनएम या अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के अचानक छुट्टी पर चले जाने से तय कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं। इससे सरकारी योजनाओं की रिपोर्टिंग और कामकाज पर भी असर पड़ा है।

इसी को देखते हुए अब जिला स्वास्थ्य समिति ने साफ कर दिया है कि अगर औचक निरीक्षण के दौरान छुट्टी का रिकॉर्ड सही नहीं मिला या रजिस्टर में गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसलिए सभी अस्पतालों को समय-समय पर रिकॉर्ड अपडेट रखने का निर्देश दिया गया है।


ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता और एएनएम की भूमिका बेहद अहम होती है। संस्थागत प्रसव के लिए जागरूकता फैलाना, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच कराना, बच्चों का टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाना इन्हीं की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अगर एक साथ कई कर्मचारी छुट्टी पर चले जाते हैं तो पूरे इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कई बार अस्पताल पहुंचने पर स्वास्थ्य कर्मी नहीं मिलते, जिससे मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। खासकर गांवों में रहने वाले लोगों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में विभाग का यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


स्वास्थ्य विभाग ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जहां किसी कर्मचारी की छुट्टी जरूरी होगी, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी ताकि आम लोगों को इलाज और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की परेशानी न हो। विभाग का उद्देश्य छुट्टियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखना है।


फिलहाल, बिहार स्वास्थ्य विभाग के इस नए आदेश के बाद डॉक्टरों, एएनएम, आशा और दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों को अब छुट्टी लेने के दौरान तय नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा। विभाग का मानना है कि इससे अस्पतालों में व्यवस्था बेहतर होगी, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। अब देखना होगा कि इन नए निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है।

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