बिहार स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियों को लेकर नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नए नियम के तहत अब सभी स्वास्थ्य कर्मियों की हर छुट्टी का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
अस्पतालों में छुट्टियों का रिकॉर्ड रखना हुआ अनिवार्य
बिहार स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने राज्य की सभी जिला स्वास्थ्य समितियों और प्रखंड अस्पतालों को निर्देश दिया है कि अब हर स्वास्थ्य कर्मी की छुट्टी का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए एक तय प्रारूप भी जारी किया गया है, जिसके आधार पर हर महीने की अवकाश सूची तैयार करनी होगी। नए आदेश के मुताबिक, अब एसएल (SL), सीएल (CL), एनएल (NL) और एल (L) जैसी सभी तरह की छुट्टियों का पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप में छुट्टी की जानकारी देना या आपसी सहमति से छुट्टी लेना अब मान्य नहीं होगा और अस्पताल प्रबंधन को हर छुट्टी का रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट रखना होगा।

टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता था असर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई बार कर्मचारी बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के छुट्टी पर चले जाते हैं, जिसका सीधा असर अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। इससे मरीजों को भारी परेशानी होती है और जरूरी सेवाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं। विभाग के अनुसार, सबसे ज्यादा असर नियमित टीकाकरण अभियान, गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों के टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला है। कई स्थानों पर एएनएम या अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के अचानक छुट्टी पर चले जाने से तय कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं, जिससे सरकारी योजनाओं की रिपोर्टिंग और दैनिक कामकाज पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
इसी स्थिति को देखते हुए अब जिला स्वास्थ्य समिति ने साफ कर दिया है कि अगर औचक निरीक्षण के दौरान छुट्टी का रिकॉर्ड सही नहीं मिला या रजिस्टर में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसलिए सभी अस्पतालों को समय-समय पर अपने रिकॉर्ड अपडेट रखने का सख्त निर्देश दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता और एएनएम की भूमिका बेहद अहम होती है, क्योंकि संस्थागत प्रसव के लिए जागरूकता फैलाना, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच कराना, बच्चों का टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाना इन्हीं की जिम्मेदारी है। ऐसे में अगर एक साथ कई कर्मचारी छुट्टी पर चले जाते हैं तो पूरे इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

वैकल्पिक व्यवस्था से मरीजों को मिलेगी राहत
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कई बार अस्पताल पहुंचने पर स्वास्थ्य कर्मी नहीं मिलते, जिससे मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है। खासकर गांवों में रहने वाले लोगों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है, इसलिए विभाग का यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जहां किसी कर्मचारी की छुट्टी जरूरी होगी, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी ताकि आम लोगों को इलाज और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की परेशानी न हो। विभाग का उद्देश्य छुट्टियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को बिना किसी रुकावट के निरंतर जारी रखना है।





