पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार सरकार ने राज्य की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत पेपर लीक रोकने, फर्जी अभ्यर्थियों पर नकेल कसने, उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ाने और शिक्षकों की क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर राज्य के लाखों विद्यार्थियों, युवाओं और शिक्षकों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और बेहतर शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की मांग कर रहे थे।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति और ऋण नीति में बदलाव
राज्य सरकार ने भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हरीश कुमार को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति विभिन्न परीक्षा बोर्डों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर तीन महीने के भीतर अपने सुधारवादी सुझाव सौंपेगी। इसके दायरे में परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, जवाबदेही तय करने और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर रोक लगाने के उपाय शामिल हैं।

इसके अलावा छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक मदद देने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के नियमों में भी राहत दी गई है। सरकार ने पहले के आदेश को संशोधित करते हुए पूर्ववत व्यवस्था बहाल की है, जिसके तहत बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम (बीएसइएफसी) के माध्यम से विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण सुलभ कराया जा रहा है ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी की पढ़ाई न रुके।
उच्च शिक्षा का विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण और शोध के लिए विशेष पहल
बिहार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेज खोले गए हैं और इन संस्थानों के लिए 2,451 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है। सरकार ने शिक्षकों के उच्चस्तरीय प्रशिक्षण पर भी जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के 100 प्राध्यापकों को ऑक्सफोर्ड समेत अन्य प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों में भेजने की घोषणा की है, ताकि वे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से रूबरू हो सकें। इसके अलावा शिक्षक दिवस पर अलग से शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय स्थापित करने का ऐलान भी किया गया है, जो करीब 7 लाख शिक्षकों के कौशल विकास पर काम करेगा।

शोध और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत लगभग 1,000 छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10,000 रुपये की फेलोशिप मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, बीपीएससी टीआरई-4 के तहत 32,388 पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए 25 सितंबर 2026 से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसकी अंतिम तिथि 25 अक्टूबर तय की गई है। हालांकि इन तमाम योजनाओं के बीच विपक्षी दल और शिक्षाविद जमीनी स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता और उनके सही क्रियान्वयन को लेकर अपनी नजर बनाए हुए हैं।





