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बांकीपुर उपचुनाव: नितिन नवीन की समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा, प्रचार से गायब हैं भाजपा के ये 6 बड़े चेहरे

By | Published: 21 Jul 2026, 11:01 AM
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बांकीपुर उपचुनाव: नितिन नवीन की समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा, प्रचार से गायब हैं भाजपा के ये 6 बड़े चेहरे
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मुख्य बातें

  • बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए केवल एक सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है।
  • दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन ने जब चुनाव तैयारियों की समीक्षा बैठक की, तो उनके सामने कई चौंकाने वाली आंतरिक रिपोर्ट आईं।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कई बड़े नेता और उपचुनाव के स्टार प्रचारक अब तक चुनावी मैदान में सक्रिय नहीं दिखाई दे रहे हैं।
  • इस स्थिति को देखते हुए नितिन नवीन ने नाराज और निष्क्रिय नेताओं की गतिविधियों, उनकी चुनावी भूमिका और प्रचार से दूरी बनाने के कारणों का पूरा ब्योरा तलब किया है।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए केवल एक सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन ने जब चुनाव तैयारियों की समीक्षा बैठक की, तो उनके सामने कई चौंकाने वाली आंतरिक रिपोर्ट आईं। इस रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कई बड़े नेता और उपचुनाव के स्टार प्रचारक अब तक चुनावी मैदान में सक्रिय नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए नितिन नवीन ने नाराज और निष्क्रिय नेताओं की गतिविधियों, उनकी चुनावी भूमिका और प्रचार से दूरी बनाने के कारणों का पूरा ब्योरा तलब किया है।


समीक्षा बैठक में सामने आए ये 6 निष्क्रिय चेहरे

आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, बांकीपुर के चुनावी मैदान में भाजपा के छह प्रमुख चेहरे धरातल पर सक्रिय नहीं दिख रहे हैं, जिससे पार्टी की चिंताओं में इजाफा हुआ है:

  • सीता साहू: पटना की मेयर और साहू (तेली) समाज का एक बड़ा चेहरा मानी जाने वाली सीता साहू की बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। पार्टी को उम्मीद थी कि वे महिला सम्मेलनों और मोहल्ला संपर्क अभियानों के जरिए माहौल बनाएंगी, लेकिन वे अब तक किसी बड़े रोड शो या संगठनात्मक बैठक में नजर नहीं आई हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके बेटे को टिकट न मिलने के कारण वे नाराज बताई जा रही हैं।
  • शिशिर कुमार: मेयर सीता साहू के बेटे और प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य शिशिर कुमार कुम्हरार विधानसभा से टिकट के दावेदार थे। टिकट न मिलने के कारण वे शुरुआती प्रचार से पूरी तरह नदारद रहे। हालांकि, शिशिर का कहना है कि उन्हें स्टार प्रचारक की जिम्मेदारी देर से मिली और वे निजी कारणों से पूर्णिया में थे। उन्होंने दावा किया है कि वे 21 जुलाई से प्रचार में उतरेंगे।
  • अश्विनी चौबे: पूर्व केंद्रीय मंत्री और बक्सर के पूर्व सांसद अश्विनी चौबे भाजपा के बड़े ब्राह्मण चेहरे हैं। स्टार प्रचारक होने के बावजूद वे शुरुआती महत्वपूर्ण दिनों में बांकीपुर में सक्रिय नहीं दिखे। लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से उनकी नाराजगी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में बनी हुई है।
  • पवन सिंह: भोजपुरी अभिनेता और हाल ही में विधान परिषद सदस्य (MLC) बने पवन सिंह भाजपा के लोकप्रिय स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। शपथ ग्रहण के बाद से वे न तो किसी बड़ी बैठक में दिखे और न ही बांकीपुर में प्रचार करते नजर आए। पार्टी का कहना है कि उनकी व्यस्तता के कारण अभी कार्यक्रम तय नहीं हो पाया है।
  • रविशंकर प्रसाद: पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद बांकीपुर में उनकी सक्रियता बेहद सीमित रही है। हालांकि वे संगठनात्मक बैठकों में जुड़े रहे हैं, लेकिन व्यापक जनसंपर्क अभियानों में उनकी उपस्थिति कम देखी गई है।
  • अजय आलोक: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक का नाम बांकीपुर सीट के संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में था। टिकट न मिलने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई असहमति तो नहीं जताई, लेकिन वे अब तक चुनाव प्रचार से दूर ही रहे हैं।

भाजपा की जीत के लिए 5 बड़ी रणनीतियां

भीतरी गतिरोध के बावजूद भाजपा ने बांकीपुर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बेहद मजबूत माइक्रो-मैनेजमेंट ढांचा तैयार किया है। पार्टी इन पांच रणनीतियों के सहारे मैदान में उतरी है:

  • 60 शक्ति केंद्र और कमांड सेंटर: पूरी विधानसभा को 60 शक्ति केंद्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक शक्ति केंद्र के तहत लगभग पांच बूथ आते हैं, जहां से मतदाता सूची, पर्ची वितरण और कार्यकर्ता प्रबंधन की दैनिक रिपोर्टिंग सीधे प्रदेश नेतृत्व को की जाती है।
  • 50 से अधिक विधायक और विधान पार्षद: पार्टी ने राज्यभर से 50 से अधिक विधायकों और एमएलसी को बांकीपुर में तैनात किया है। इन नेताओं को अलग-अलग शक्ति केंद्रों और मोहल्लों की जिम्मेदारी दी गई है ताकि वे डोर-टू-डोर संपर्क साध सकें।
  • जातिगत समीकरणों के आधार पर तैनाती: सामाजिक गणित को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने विभिन्न क्षेत्रों में उसी समाज के प्रभावशाली नेताओं को तैनात किया है। ब्राह्मण, वैश्य और महिला बहुल इलाकों में उसी वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • A, B, C, D वोटर मॉडल: मतदाताओं को चार श्रेणियों में बांटा गया है। 'A' श्रेणी में पक्के समर्थक, 'B' में झुकाव रखने वाले, 'C' में असमंजस वाले और 'D' में विरोधी मतदाता शामिल हैं। भाजपा का पूरा ध्यान 'C' श्रेणी के असमंजस वाले मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर केंद्रित है।
  • 10 मंडल कार्यालयों से दैनिक मॉनिटरिंग: बांकीपुर को 10 मंडलों में बांटकर अस्थायी चुनाव कार्यालय बनाए गए हैं। बूथ अध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक से हर दिन का फीडबैक लिया जा रहा है, जिसकी समीक्षा खुद नितिन नवीन कर रहे हैं।

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