खबर डोज़ ब्यूरो। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI ने देश की विशाल बायोमेट्रिक व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। आधार कार्ड में डुप्लीकेसी और फर्जीवाड़े की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए 'Bharat ABIS' नाम का नया ओपन-सोर्स बायोमेट्रिक सिस्टम तैयार किया गया है। इस तकनीक के आने से न सिर्फ फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, बल्कि करोड़ों देशवासियों को फिंगरप्रिंट मिलान न होने जैसी रोजमर्रा की दिक्कतों से भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

कैसे काम करती है नई Bharat ABIS तकनीक
आधार प्रणाली के विशाल डेटाबेस को संभालने में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए इस ओपन-सोर्स सिस्टम को तैयार किया गया है। इसे बनाने में UIDAI के छह शोधकर्ताओं के अलावा ट्रिपल आईटी हैदराबाद के विशेषज्ञ और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के जाने-माने बायोमेट्रिक्स रिसर्चर अनिल जैन की टीम शामिल रही है। इस नए सिस्टम को करीब 1 लाख से 2 लाख डी-आइडेंटिफाइड डेटासेट पर प्रशिक्षित किया गया है और इसे 22 करोड़ आधार रिकॉर्ड्स की गैलरी पर परखा जा चुका है।
तकनीकी परीक्षण के दौरान यह प्रणाली बेहद सटीक और तेज साबित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो करोड़ रिकॉर्ड्स पर हुई टेस्टिंग में सही आईडी को डुप्लीकेट बताने की दर महज 0.1 प्रतिशत रही, जबकि डुप्लीकेट कार्ड को पहचानने में चूक होने का खतरा केवल 0.05 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा, 8 एनवीडिया एच100 जीपीयू और दो टीबी रैम वाला एक अकेला सर्वर चार करोड़ रिकॉर्ड्स में से सौ सर्च महज एक सेकंड में पूरा करने की क्षमता रखता है।

बुजुर्गों और मेहनतकश लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ देश के बुजुर्गों और उन मेहनत-मजदूरी करने वाले नागरिकों को मिलेगा जिनके हाथ की रेखाएं और उंगलियों के निशान उम्र या कठिन श्रम के कारण घिस जाते हैं। कई बार राशन की दुकानों पर या पेंशन प्राप्त करते समय फिंगरप्रिंट मैच न होने के कारण लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नई ABIS तकनीक ऐसे घिसे हुए निशानों को भी आसानी से पहचान लेगी, जिससे सत्यापन न होने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
इसके साथ ही, इस ओपन-सोर्स तकनीक को दुनिया भर के लगभग 160 ऐसे छोटे देशों के लिए भी मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना है जो महंगे बायोमेट्रिक सिस्टम खरीदने में असमर्थ हैं। हालांकि, इस उन्नत तकनीक को पूरे भारत में पूरी तरह से लागू करने से पहले अभी कुछ और व्यापक परीक्षण किए जाने बाकी हैं, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा।





