बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने संगठन को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। बांकीपुर में मिली करारी हार के बाद पार्टी ने प्रदेश से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की ओर से 6 अगस्त को जारी पत्र के बाद अब पार्टी में नए सिरे से पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के चयन का रास्ता साफ हो गया है। पार्टी अब पुराने ढर्रे के बजाय नई टीम और नई सोच के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में जुटी है।
नई संगठनात्मक संरचना और कार्यकर्ताओं के लिए योग्यता
पढ़े-लिखे और संघर्षशील चेहरों को मिलेगी प्राथमिकता
प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि नई आरजेडी में केवल राजनीतिक पहचान या पुराने जुड़ाव के आधार पर पद मिलना आसान नहीं होगा। पार्टी अब ऐसे चेहरों को आगे लाने की तैयारी कर रही है जो शिक्षित होने के साथ-साथ जमीन पर सक्रिय रहकर काम करने की क्षमता रखते हों।

संगठन के नए स्वरूप को लेकर पार्टी के तय किए गए मानदंडों में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
- पार्टी में पढ़े-लिखे, सक्षम, समझदार और निष्ठावान लोगों को तरजीह दी जाएगी।
- धरना-प्रदर्शन में भाग लेने वाले और आंदोलन के दौरान जेल जाने से पीछे न हटने वाले संघर्षशील कार्यकर्ताओं को महत्व मिलेगा।
- समाज के अलग-अलग वर्गों को संगठन से जोड़कर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सक्रिय और पार्टी की विचारधारा को समझने वाले कार्यकर्ताओं को संगठन की मुख्य धारा में लाना है।
शिक्षकों के मुद्दों पर राजद का समर्थन
संगठन में बदलाव के बीच राजद ने नीतिगत और जनहित के मुद्दों पर भी अपनी आवाज मुखर की है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री को लिखी गई चिट्ठी का पूर्ण समर्थन किया है।

तेजस्वी यादव ने अपनी चिट्ठी में सरकारी विद्यालयों में उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षकों के अनुचित स्थानांतरण का मुद्दा उठाया था। इसके साथ ही अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक-कर्मियों के लंबित वेतन का तत्काल भुगतान करने और सरकारी विद्यालयों में उर्दू एवं संस्कृत शिक्षकों की पदस्थापना की मांग की गई थी। मंगनी लाल मंडल ने कहा कि शिक्षकों का लंबित वेतन उनका अधिकार है और इसका भुगतान जल्द से जल्द होना चाहिए।
फिलहाल संगठन को रीसेट करने के इस फैसले के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी की नई संगठनात्मक टीम में किन चेहरों को जगह मिलती है और यह बदलाव आगामी राजनीतिक परिदृश्य में राजद के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है।





