पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में बाढ़ की विभीषणता से जूझ रहे परिवारों की सहायता के लिए राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों ने अपने कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ का पानी फैलने और जनजीवन अस्त-व्यस्त होने के बाद अब आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद मिलने लगी है। इसी कड़ी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी आरएलएम की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए तीन लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान की गई। संकट के इस दौर में प्रशासनिक राहत कार्यों के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर मिल रहे इस सहयोग से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है। राजधानी पटना में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इस अवसर पर आरएलएम के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह, विधायक स्नेहलता कुशवाहा और विधायक माधव आनंद की प्रमुख मौजूदगी रही। नेताओं ने मुख्यमंत्री को तीन लाख रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान चर्चा हुई कि बाढ़ के कारण जिन परिवारों के सामने खाने-पीने और रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं का संकट खड़ा हो गया है, उन तक यह सहायता जल्द से जल्द पहुंचाई जाए।

विभिन्न दलों के नेताओं ने दान किया एक महीने का वेतन
केवल एक दल तक यह मुहिम सीमित नहीं रही है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने स्तर पर योगदान दिया है। जनता दल यूनाइटेड के विधायक रामसेवक सिंह ने आपदा प्रभावितों की मदद के लिए अपने एक महीने के वेतन की पूरी राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराई है। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के विधायक जीवेश कुमार और भाजपा विधान पार्षद जनक राम ने भी अपने एक महीने के वेतन का चेक सौंपा है। इसके अलावा पूर्व विधायक ललित यादव ने सक्रिय राजनीति से अलग होने के बावजूद अपनी एक महीने की पेंशन की राशि बाढ़ पीड़ितों के नाम पर दान की है।
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में 3 लाख रुपये का योगदान।
- जदयू विधायक रामसेवक सिंह द्वारा एक माह के वेतन का दान।
- भाजपा विधायक जीवेश कुमार और विधान पार्षद जनक राम द्वारा एक महीने के वेतन का चेक सुपुर्द।
- पूर्व विधायक ललित यादव द्वारा एक महीने की पेंशन राशि राहत कोष में जमा।

बिहार के कई जिलों में नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में पानी घुसने से ग्रामीण इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और लोगों के सामने सुरक्षित ठिकानों पर रहने की चुनौती है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत शिविर चलाने के साथ ही पॉलीथिन शीट और सूखे राशन का वितरण किया जा रहा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों द्वारा व्यक्तिगत और पार्टी स्तर पर दिया जाने वाला यह वित्तीय योगदान सरकारी राहत तंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है।

मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होने वाली इस पूरी राशि का उपयोग सीधे तौर पर आपदा पीड़ितों के कल्याण और राहत कार्यों के संचालन में किया जाता है। चेक प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल घड़ी में समाज और जनप्रतिनिधियों का आगे आना सराहनीय है और मुख्यमंत्री राहत कोष में प्राप्त यह राशि जरूरतमंद लोगों की सहायता में पूरी तरह उपयोगी साबित होगी। अब प्रशासन के सामने मुख्य चुनौती इन संसाधनों को जमीनी स्तर पर पारदर्शिता के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित परिवारों तक समय पर पहुंचाने की है।





