वाराणसी (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार सरकार के मंत्री और जेडीयू नेता निशांत कुमार के उत्तर प्रदेश दौरे ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। वाराणसी पहुंचने के बाद उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दरबार में पूजा-अर्चना की और गंगा आरती में शामिल हुए। इसके बाद सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में जेडीयू आगामी विधानसभा चुनाव एनडीए गठबंधन के तहत ही लड़ेगी। निशांत कुमार के इस बयान से उन चर्चाओं पर विराम लग गया है, जिनमें पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब जेडीयू पूर्वांचल में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
निशांत कुमार ने वाराणसी दौरे पर बात करते हुए कहा कि उन्हें इस पावन धरती पर आने और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद मिलने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी एनडीए पूरी तरह एकजुट है और राज्य में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनेगी तथा योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे पहले बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी जानकारी दी थी कि आगामी 25 अक्टूबर को बनारस में जेडीयू का एक बड़ा समागम आयोजित किया जाएगा, जिसमें पार्टी की उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पूर्वांचल पर खास फोकस और पिछड़ा वर्ग समीकरण
जेडीयू की रणनीति इस बार उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र पर विशेष रूप से केंद्रित है। पार्टी वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर और देवरिया जैसे जिलों में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को लगातार बढ़ा रही है। इन इलाकों में कुर्मी, पटेल और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाताओं की अच्छी खासी मौजूदगी है। जेडीयू का सामाजिक आधार लंबे समय से पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग रहा है। पार्टी का मानना है कि बीजेपी और अपना दल एस जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर मैदान में उतरने से इन इलाकों में एनडीए को बड़ा चुनावी फायदा मिल सकता है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला और तस्वीर सहयोगियों के साथ होने वाली बैठकों के बाद ही स्पष्ट होगी।

बीते चुनावों में कैसा रहा है जेडीयू का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो जेडीयू का प्रदर्शनこれまで बहुत मजबूत नहीं रहा है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू और बीजेपी के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था और पार्टी के उम्मीदवार किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाए थे। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सीटों पर सहमति न बनने के कारण जेडीयू ने 26 सीटों पर अकेले ही अपने उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, तब पार्टी को कोई भी सीट नहीं मिली थी और वोट शेयर भी करीब 0.11 प्रतिशत के आसपास रहा था। अब इस बार पार्टी अकेले लड़ने के बजाय एनडीए के साथ मिलकर अपनी पुरानी कमियों को सुधारने और नए राजनीतिक समीकरण के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।





