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राजेश राम की बेइज्जती? ज्ञापन पर साइन तक नहीं

| Published: | Updated:
राजेश राम की बेइज्जती? ज्ञापन पर साइन तक नहीं
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मुख्य बातें

  • पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के 'लोकभवन मार्च' के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के बीच का तालमेल पूरी तरह बिगड़ गया।
  • राजद ने तय समय से पहले ही मार्च निकाल दिया, जिसके कारण बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी नहीं कर सके और कांग्रेस इस पूरे प्रदर्शन में अलग-थलग दिखाई दी।
  • बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है।
  • अब 'ज्ञानेश हटाओ लोकतंत्र बचाओ' मार्च के दौरान हुआ यह घटनाक्रम इस तल्खी को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के 'लोकभवन मार्च' के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के बीच का तालमेल पूरी तरह बिगड़ गया। राजद ने तय समय से पहले ही मार्च निकाल दिया, जिसके कारण बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी नहीं कर सके और कांग्रेस इस पूरे प्रदर्शन में अलग-थलग दिखाई दी।

बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है। अब 'ज्ञानेश हटाओ लोकतंत्र बचाओ' मार्च के दौरान हुआ यह घटनाक्रम इस तल्खी को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। गुरुवार को पटना की सड़कों पर विपक्षी एकजुटता का जो प्रदर्शन होना था, वह आपसी तालमेल की कमी के कारण बिखरा हुआ नजर आया।

राजेश राम की बेइज्जती? ज्ञापन पर साइन तक नहीं

तय समय से पहले शुरू हुआ तेजस्वी यादव का मार्च

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने साझा बैठक में गुरुवार सुबह 11 बजे लोकभवन मार्च निकालने का फैसला किया था। खुद तेजस्वी यादव ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस समय की घोषणा की थी। लेकिन गुरुवार सुबह अचानक घटनाक्रम बदल गया। राजद और अन्य सहयोगी दलों के कार्यकर्ता सुबह 9:30 बजे से ही शहीद स्मारक पर जुटने लगे। तेजस्वी यादव सुबह 10:15 बजे वहां पहुंचे और करीब 10:30 बजे उनके नेतृत्व में मार्च लोकभवन के लिए रवाना हो गया।

राजेश राम की बेइज्जती? ज्ञापन पर साइन तक नहीं

दूसरी तरफ, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तय समय से दस मिनट पहले यानी सुबह 10:50 बजे शहीद स्मारक पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि मुख्य मार्च काफी पहले ही निकल चुका है। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग से मार्च शुरू किया, लेकिन तब तक मुख्य विपक्षी शिष्टमंडल राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर रहा था।

ज्ञापन पर नहीं हो सके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के हस्ताक्षर

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर उस छह सूत्री मांग पत्र पर पड़ा जो राज्यपाल को सौंपा गया। इस महत्वपूर्ण ज्ञापन पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम के हस्ताक्षर ही नहीं हो सके। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पूरी तरह अलग-थलग दिखाई दी, हालांकि कांग्रेस के पूर्व विधायक शकील अहमद खान सुबह 10 बजे से ही तेजस्वी यादव के साथ मार्च में शामिल थे।

राजेश राम की बेइज्जती? ज्ञापन पर साइन तक नहीं

समय में हुए इस बदलाव को लेकर दोनों दलों के बीच विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं:

  • कांग्रेस का पक्ष: कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव ने कहा कि चूंकि 11 बजे का समय तय था और तेजस्वी यादव के हस्ताक्षर से ही सूचना जारी की गई थी, इसलिए उनके नेता 10:50 बजे पहुंचे। उन्हें समय बदलने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी।
  • राजद का पक्ष: राजद के प्रधान महासचिव रणविजय साहू ने दावा किया कि समय में बदलाव की सूचना कांग्रेस नेतृत्व को समय पर दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि लोकभवन गए प्रतिनिधिमंडल में भी कांग्रेस के नेता शामिल थे।

हथकड़ी लगाकर प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी

जब कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम अपने कार्यकर्ताओं के साथ लोकभवन परिसर पहुंचे, तब तेजस्वी यादव और अन्य नेता ज्ञापन सौंपकर वापस लौट रहे थे। इसके बाद राजेश राम वापस शहीद स्मारक लौटे और वहां प्रतीकात्मक रूप से हथकड़ी लगाकर प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। उन्हें सचिवालय थाना ले जाया गया, जबकि अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एयरपोर्ट थाना भेजा गया। पुलिस ने करीब दो घंटे तक हिरासत में रखने के बाद सभी नेताओं को बांड भरवाकर रिहा कर दिया।

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